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सहकारी समितियों पर लगा ताला, कैसे होगी गेहूं की बुआई

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मैनपुरी। सहकारी समितियों पर तालाबंदी के बाद किसानों के सामने गेहूं की बुआई का संकट खड़ा हो गया है। ये हड़ताल कब तक चलेगी इसका कोई पता नहीं है। ऐसे में किसानों को चिंता सता रही है कि आखिर उनके खेतों की बुआई कैसे होगी। अगर हड़ताल खत्म न हुई तो किसानों को नुकसान होना तय है।
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अपनी मांगों को लेकर रविवार से सहकारी समितियों पर तैनात सचिवों ने हड़ताल शुरू कर दी है। धान की बिक्री के बाद अब गेहूं की बुआई शुरू होने वाली है, लेकिन सहकारी समितियों की हड़ताल के चलते गेहूं की बुआई पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। जिले में कुल 58 सहकारी समितियां हैं। इन सभी समितियों पर हजारों किसान सदस्य हैं। इन किसानों को देने के लिए सभी समितियों पर खाद और गेहूं का बीज पहुंच चुका है। जल्द ही इसका वितरण शुरू होना था। लेकिन हड़ताल के चलते अब ये खाद और बीज गोदामों में बंद हो गया है।

ये हड़ताल कब तक चलेगी इसका कोई पता नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार गेहूं की बुवाई एक नवंबर से शुरू हो जाती है जो 20 नवंबर तक चलती है। ऐसे में अगर हड़ताल 20 नवंबर तक चलती है तो किसानों को देरी से गेहूं की बुआई करनी पड़ेगी। इससे उत्पादन प्रभावित होना तय है। सहकारी समिति सचिव एसोसिएशन के अध्यक्ष हरिपाल सिंह ने बताया कि जब तक मांगें नहीं मानी जाती हैं तब तक हड़ताल जारी रहेगी।
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समितियों पर खाद और बीज उधार मिलता है
हड़ताल के दौरान किसान बाजार से भी तो खाद और बीज खरीद सकते हैं, लेकिन ऐसा नहीं करेंगे। इसका एक खास कारण है कि समितियों पर किसानों को उधार में खाद और बीज का वितरण किया जाता है। इसका भुगतान छह माह बाद फसल तैयार होने पर करना पड़ता है। ऐसे में किसानों को आसानी हो जाती है।

मैनें खुद सचिवों से हड़ताल न करने का आग्रह किया है। जल्द ही सभी समितियों पर बिक्री की जाएगी। इससे किसानों को समस्या नहीं होगी। शिवजी यादव, सहायक आयुक्त व सहायक निबंधक सहकारिता।
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किसानों से बात
ये गेहूं की बुआई का समय चल रहा है। ऐसे में सहकारी समिति की हड़ताल नहीं होनी चाहिए थी। इससे किसानों के सामने बुवाई का संकट आ जाएगा।
भजनलाल, रमईहार।

सहकारी समितियों पर वैसे ही किसानों को मुश्किल से खाद बीज मिल पाता है। अब अगर समितियां बंद रहेंगी तो किसान बुआई कैसे कर पाएंगे।
केशव कुमार, अस्यौली।

प्रशासन को इसके लिए कोई न कोई विकल्प निकालना चाहिए। अगर सचिव हड़ताल पर हैं तो अन्य कर्मचारियों की ड्यूटी लगानी चाहिए।
दीपक, नगरिया।

अगर समय रहते किसानों को खाद और गेहूं का बीज नहीं मिला तो बुवाई नहीं हो पाएगी। इससे जिले में उत्पादन भी काफी हद तक प्रभावित होगा।
सर्वेश कुमार, दीवानी रोड।
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