योगी अंकल, आपने ड्रेस बदल दी, मास्टरजी रोज आने लगे। पढ़ाई हो रही है, लेकिन गर्मी चैन नहीं लेने दे रही। कापी पर पसीना गिरता है, आखिर कैसे लिखें? कुछ यही गुहार सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले कक्षा एक से आठवीं तक के बच्चों की मुख्यमंत्री योगी से है। एक ओर योगी सरकार शिक्षा व्यवस्था को सीबीएसई स्कूलों की तर्ज पर करने जा रही है, लेकिन अधिकांश स्कूलों में न तो पंखे हैं और न ही बिजली कनेक्शन।
जिले में 1927 प्राइमरी और जूनियर हाईस्कूल में करीब दो लाख बच्चे पढ़ रहे हैं। प्राथमिक विद्यालय कैलाशगंज में न तो बिजली है और न ही पंखे। शुक्रवार को विद्यालय में जलभराव होने के चलते जल्दी छुट्टी कर दी गई थी। विद्यालय का हाल इतना खराब है कि यहां पढ़ने की कल्पना ही नहीं की जा सकती।
विद्यालय में बच्चों के लिए हवा मयस्सर नहीं है। दीवारों पर प्लास्टर तक नहीं है और गर्मियों में बच्चों की आफत बढ़ जाती है। बच्चे बरामदेनुमा कमरों में बैठकर पढ़ रहे थे और शिक्षिका पसीना पोंछ रही थी। प्राथमिक कन्या विद्यालय पटियाली गेट में बिजली कनेक्शन नहीं है और पंखों की हवा को बच्चों को सालों से नसीब नहीं हुई। शहर के सबसे पुराने प्राथमिक विद्यालय में बच्चों को गर्मी में पढ़ाई करने को मजबूर होना पड़ता है। वहीं विद्यालय की जर्जर इमारत व्यवस्था की पोल खोल रही है।
कम हो गया बजट
जिले में पिछले साल विस चुनाव के दौरान करीब 500 स्कूलों में बिजली कनेक्शन नहीं मिले। जिनमें चुनाव आयोग के डंडे के बाद अस्थाई व्यवस्था कराई गई, लेकिन स्थिति फिर से जस की तस कर हो गई। वहीं विभाग का विद्युत निगम पर लाखों का बकाया है। जिसके चलते अधिकांश कनेक्शन काटे जा चुके हैं।