नंदगांव (मथुरा)। फाग महोत्सव ब्रज में सबसे लंबा चलने वाला महोत्सव है। इसकी शुरूआत वसंत पंचमी से होती है। सवा महीने से भी अधिक समय तक इस महोत्सव की धूम रहती है। कैसौ ये देश निगोरा, जगत होरी ब्रज होरा। ब्रज के लिए कही जाने वाली ये कहावत यूं ही नहीं है। ब्रज में फागुन के समापन के बाद भी हुरंगों का आयोजन होता है।
नंदबाबा के नाम से बसे नंदगांव में विश्व प्रसिद्ध लठामार होली से इतर ऐतिहासिक हुरंगा भी होता है। अगर आप नंदगांव बरसाना की लठामार होली देखने से वंचित रह गए हैं तो इस लीला के साक्षात्कार के लिए अभी और समय है। जिस उत्साह के साथ देशभर में फागुन की पूर्णिमा व उससे अगले दिन होली मनाई जाती है, उससे कहीं अधिक उत्साह से बलदेव, गोकुल, महावन, जाव बठैन, नंदगांव, गिडोह में हुरंगों का आयोजन होता है। गांव गिडोह में चैत्र महीने की दौज व तृतीया को हुरंगा होता है।
मान्यता है कि एक बार बलदेव जी के मन में भी राधा जी से होली खेलने की लालसा हुई। लेकिन राधा जी के ज्येष्ठ होने के कारण वो उनसे होली खेलने के लिए सकुचा रहे थे। आखिरकार उन्होंने वासना रहित प्रेम के प्रति ज्येष्ठ होने की मर्यादा को भी पीछे छोड़ दिया और राधा जी के साथ होली खेलने लगे। ब्रज में एक कहावत भी है कि फागुन में जेठ कहै भाभी। पेड़ों की डालियों की ओट से दाऊ जी राधा जी से होली खेलते हैं।
अब राधा जी के सामने बड़ी विडंबना थी कि कैसे बलदाउ जी से होली खेली जाए। राधा जी ने भी दाऊजी से होली खेलने की युक्ति सोची और हाथ में एक शीशा लेकर उसमें बने बलदाऊ जी के प्रतिबिंब को ही गुलाल लगा दिया। इस प्रकार राधा जी पूरी तरह मर्यादित होकर ज्येष्ठ से होली खेलती हैं। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए आज भी हुरियारिनें जब होली खेलती हैं तो उनके हाथों में शीशे होते हैं। नंदगांव में तीन मार्च को तथा गिडोह में चार मार्च को ऐतिहासिक हुरंगा होगा।