खुशियों की दिवाली पर्यावरण में जहर घोल गई। पटाखों के धुआं और शोर से जिले में जमकर प्रदूषण हुआ। जिले में शुक्रवार को प्रदूषण में 10 फीसदी इजाफा दर्ज किया गया। हालांकि प्रदूषण के आंकड़े महानगरों के मुकाबले कर्म दर्ज किया गया, लेकिन जिले के लिहाज से प्रदूषण की स्थिति खतरनाक है। दिवाली पर जिलेभर में करोड़ों रुपये के पटाखे स्वाहा हुए।
धुआं, धूमधड़ाके ने गुरुवार को लोगों की धड़कनों में इजाफा कर दिया। एक ओर जहां प्रदूषण की मात्रा में इजाफा हुआ। वहीं दूसरी ओर कानफोड़ू शोर ने लोगों को परेशान किया। दिवाली त्योहार पर हर साल प्रदूषण कई गुना तक बढ़ जाता है। इस बार प्रदूषण में 10 फीसदी इजाफा दर्ज किया गया। ध्वनि प्रदूषण 95 डेसिबल से बढ़कर 150 डेसिबल तक पहुंच गया। वहीं वायु प्रदूषण में संस्पेंडेड पार्र्टीकल्स और मैटर की मात्रा में भी बढ़ोतरी हुई। यह मात्रा 96 से बढ़कर 120 तक पहुंच गई। हालांकि बड़े महानगरों के मुकाबले आंकड़े बेहद कम हैं, लेकिन बढ़ता प्रदूषण सेहत के लिए हानिकारक हालात पैदा कर रहे हैं। मानकों के मुताबिक सल्फरडाई ऑक्साइड, नाइट्रोजन आक्साइड के अलावा संस्पेडेड पार्टीकल्स ऑफ मैटर की मात्रा मानक के अनुरूप 120 माइक्रोग्राम होनी चाहिए। अलीगढ़ प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी डा. केपी सिंह बताते हैं मानक से अधिक स्थिति प्रदूषण दिवाली पर हर साल होता है। लोगों को इससे परहेज करने की जरूरत है।
दिखा पर्यावरण संरक्षण का असर
पटाखों को लेकर जिले में पर्यावरण संरक्षण का असर भी नजर आया। लोगों ने तेज आवाज और धुआं वाले पटाखों से परहेज किया। पटाखा कारोबार पर चाइना उत्पादों के बहिष्कार का असर साफ नजर आया।
ये कहते हैं आंकड़े
ध्वनि प्रदूषण
दिवाली से पहले
85 से 95 डेसिबल
दिवाली के बाद
120 से 150 डेसिबल
मानक- 100 डेसिबल तक
वायु प्रदूषण (माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर)
दिवाली से पहले
पीएम एसओ एनओ
94 40 49
दिवाली के बाद
पीएम एसओ एनओ
120 45 55
मानक
पीएम एसओ एनओ
120 40 50
बढ़ा बीमारियों का खतरा
पर्यावरण में प्रदूषण बढ़ने से बीमारियों का खतरा बढ़ता जा रहा है। डा. पवन मिश्रा कहते हैं कि बढ़ते प्रदूषण से अस्थमा, दमा और ब्रेन हेमरेज के मरीज बढ़ रहे हैं। वहीं धुएं से आंखों में एलर्जी के मामले बढ़े हैं। लोगों को इनसे बचने की जरूरत है।