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110 बैंक शाखाओं पर ताले, नकदी के पड़े लाले

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bank strike
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एटा। जिले की 110 बैंक शाखाओं पर मंगलवार को ताले पड़ने से करीब 100 करोड़ का कारोबार प्रभावित हुआ। राष्ट्रीयकृत बैंकों की हड़ताल के चलते उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ा। साथ ही कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया।
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यूनाइटेड बैंक यूनियन के आह्वान पर बैंक कर्मचारियों ने सिविल लाइंस बैंक शाखा पर प्रदर्शन किया। केनरा बैैंक मुख्य शाखा पर वाइस चेयरमैन उप्र जेपी गौड़ ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का निजीकरण नहीं किया जाए। बैंकों के विलय तथा समेकन की योजनाओं को रोका जाए। क्षेत्रीय सचिव प्रभात कुमार और राज्य समिति सदस्य बलवीर सिंह ने कहा कि जान बूझकर बैंकों का ऋण न चुकाने को फौजदारी अपराध घोषित किया जाए। प्रस्तावित एफडीआईआए बिल को वापस लिया। ग्रामीण बैंक ऑफ आर्यावर्त के क्षेत्रीय कार्यालय पर केंद्रीय प्रेसीडेंट उमेश यादव, वरिष्ठ उपाध्यक्ष आरके गुप्ता, आरपी सक्सेना, महीपाल सिंह के नेतृत्व में कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया। वहीं भारतीय स्टेट बैंक पर आंचलिक सचिव धर्मेेंद्र चंदवरिया के साथ कर्मचारियों ने मांगें पूरी नहीं होने पर आक्रोश जताया।

इस दौरान दिनेश प्रकाश, मान सिंह, शिशुपाल सिंह, अंकित यादव, अश्वनी कुमार, राहुल, रामबाबू, रामप्रकाश, दलवीर सिंह, नेकसे लाल, शांति लाल, सुधीर जैन, चंदन कुमार, राकेश कुमार, राम गोपाल, सुशील कुमार, प्रभात कुमार, विजय कुमार, तरुण मिश्रा, शोभाराम यादव, सत्यपाल यादव, जेके शाक्य, जीसी जैन, सुरेंद्र सिंह समेत तमाम बैंक कर्मचारी मौजूद रहे। वहीं हड़ताल से कारोबार को करोड़ों का नुकसान हुआ। जिले की राष्ट्रीयकृत बैंकों की समस्त शाखाओं में काम न होने से करीब 100 करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार प्रभावित हुआ। इस दौरान लोग नकदी निकासी को भटकते नजर आए।
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मायूस होकर लौटे उपभोक्ता
हड़ताल की जानकारी नहीं होने से लोग बैंकों में आर्थिक लेन-देन को पहुंचे। इस दौरान शाखाओं पर ताले देखकर उपभोक्ताओं को मायूस होकर लौटना पड़ा।
एटीएम भी पड़े रहे ठप
बैंक हड़ताल के चलते एटीएम भी ठप नजर आए। शहर के जीटी रोड स्थित पंजाब नेशनल बैंक के एटीएम पर कतारें लगी रहीं। वहीं अन्य एटीएम पर ताले लटके रहे। जिसके चलते लोग नकदी निकासी को भटकते नजर आए।

कासगंज।
सरकार की नीतियों के विरोध में मंगलवार को बैंक कर्मी हड़ताल पर रहे। हड़ताल के चलते 93 बैंक शाखाओं पर ताले लटके रहे। ऐसे में लगभग 200 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित होने का अनुमान है। हड़ताल के चलते उपभोक्ताओं को भी खासी दिक्कतें हुईं।
बैंक कर्मियों ने सरकारी बैंकों को निजी हाथों में सौंपने के विरोध, बैंकों को एकीकृत करने के विरोध, कारपोरेट एनपीए को डूबा ऋण घोषित करने, बैंक शुल्कों में बढ़ोत्तरी करने आदि मांगों को लेकर हड़ताल की। हडताल के चलते एसबीआई, केनरा बैंक, यूनियन बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक आफ बड़ौदा कारपोरशन बैंक, ग्रामीण बैंक आदि की 93 बैंक शाखाओं में ताले लटके रहे। इन बैंको में प्रतिदिन लगभग पांच लाख लोग लेन-देन के लिए पहुंचते हैं। कर्मियों ने सरकार की नीतियों के विरोध में शाखाओं पर प्रदर्शन भी किया। एसबीआई मुख्य शाखा के प्रबंधक आरके सिंह ने बताया कि सरकारी की जनविरोधी बैंकिंग सुधार नीतियों के विरोध में कर्मियों ने अपनी हड़ताल रखी।
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