फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

वाहन घोटाले में पूर्व सीएमओ दोषी

विज्ञापन
वाहन - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विज्ञापन
फिरोजाबाद। अखिलेश सरकार में ठंडी पड़ी जांच योगी सरकार आते ही पूरी हो गई है। वित्तीय वर्ष 2015-16 में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम में वाहन घोटाले में पूर्व सीएमओ सहित सात चिकित्सकों को शासन ने दोषी माना है। राज्य स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत डाक्टर एवं अन्य स्टाफ द्वारा न केवल कागज में जांच की बात सामने आई है बल्कि स्कूटर, बाइक, टैक्टर का नंबर दिखाकर बोलरो, स्कार्पियो समेत बड़ी गाड़ियों का भुगतान लिया गया था।
विज्ञापन


ऑडिट में जांच के बाद मामला सामने आया है। पूर्व में सरकार में जांच दबी रह गई थी। वाहन स्वामियों के खिलाफ एफआईआर पहले ही दर्ज कराई जा चुकी है। जांच में तत्कालीन सीएमओ डा. एनएल यादव, डा. पुष्कर आनंद, डा. संजीव वर्मा, डा. लालकुमार, डा. दीपेंद्र यादव, डा. मनोज तिवारी, डा. मुशीर अहमद और डा. विनित यादव दोषी पाए गए हैं।

टेंडर में जिन वाहनों के नंबर प्रस्तुत किए हैं, उसमें अनेक वाहन टैक्सी परमिट वाहन नहीं हैं। कार, स्कूटर, ट्रैक्टर, थ्री व्हीलर, मोटर साइकिल, ट्रक, बस आदि के नंबर दिए जा रहे हैं। उनका अनुमोदन भी गया था।

अनुमोदित वाहनों के स्थान पर दूसरे वाहन ब्लाकों में चलाए जा रहे हैं।जबकि दूसरे अनुमोदित वाहनों के नंबर बिल में दिए जा रहे हैं।

टेंडर में एक ही नंबर की दो या दो से अधिक वाहनों का अनुमोदन दिया जा रहा है।
एक जनपद के वाहन दूसरे जनपद में चलाए जा रहे हैं। दूसरे जनपदों में भी उनका भुगतान लिया जा रहा है।

मोबाइल हेल्थ टीम के लिए स्वीकृत वाहनों को इंद्रधनुष एवं अन्य कार्यक्रमों में चलाया जा रहा है। व दोहरा भुगतान लिया जा रहा है।

वाहन नियमित 25 दिन नहीं चल रहे हैं, जबकि वाहनों का भुगतान 25 दिन हो रहा है।
जिले के एका ब्लाक में वाहन नंबर यूपी 79 एफ 5775के नाम से भुगतान हुआ है। स्वास्थ्य विभाग ने इसे बोलेरो वाहन दिखाया है। जबकि यह वाहन प्राइवेट वाहन एलएमवी (लोडिंग मोटर व्हीकल) पाया है।
विज्ञापन


मदनपुर में मारुति ओमनी (यूपी 83एटी 4868) के नाम से वाहन दर्शाया गया है। जबकि हल्का सामना लोडिंग वाहन पाया गया है।
अरांव में मारुति ओमनी(यूपी 16 बीपी 4110) के नाम से भुगतान हुआ है। जबकि इसका वाहन नंबर जांच में गलत पाया है।

सीएमओ डॉ एसके दीक्षित कहते हैं कि वाहन अनियमित्ताओं की जांच शासन पर चल रही थी। मामला हमारे चार्ज लेने से पूर्व का है। जानकारी मिली है कि कई अधिकारी जांच में दोषी मिले हैं। क्या निर्णय रहता है, यह निर्णय शासन के हाथ में हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें