मथुरा। अब यदि जर्जर भवन गिरा और कोई अप्रिय घटना होती है तो इसकी जिम्मेदारी से नगर निगम ने अपना पल्ला झाड़ लिया है। निगम ने जर्जर भवनों के स्वामियों को इसके लिए जिम्मेदार बताया है। खाली प्लाट के मालिकों को उसमें जलभराव होने से रोकने के निर्देश दिए हैं। साथ ही नाले-नालियों पर कब्जा करने वालों को चेतावनी भी दी गई है। इस संबंध में नोटिस जारी किए गए हैं।
नगर निगम क्षेत्र में लगभग 200 प्राचीन भवन हैं। इनकी हालत एकदम जर्जर हो चुकी है। इनके गिरने से कभी भी अप्रिय घटना हो सकती है। यह करीब आठ साल पहले नगर पालिका की ओर से किए गए सर्वे में चिह्नित किए गए थे। इसके बाद से अब तक न तो सर्वे किया गया है और न ही जर्जर भवनाें को गिराने के निर्देश दिए गए हैं।
अब नगर निगम ने जर्जर भवनाें के गिरने की स्थिति भवन स्वामी को जिम्मेदार बताते हुए अपनी जिम्मेदारी से मुंह फेर लिया है। सहायक नगर आयुक्त डॉ. ब्रजेश कुमार ने निर्देश दिए हैं कि गिरासू भवन स्वामी अपने भवनों को स्वयं गिरा लें। ताकि कोई भी अप्रिय घटना न हो। यदि ऐसी कोई घटना होती है तो इसके लिए भवन स्वामी जिम्मेदार होंगे।
खाली प्लाट मालिकाें को चेतावनी दी गई है कि वह अपने प्लाट में जलभराव न होने दें। जिससे उसमें भरा पानी आसपास के मकानों की नींव तक न पहुंचे। इसके साथ ही नाली-नालों पर रैंप बनाकर अवैध कब्जा करने वालों को कब्जा हटाने की चेतावनी दी गई है। डा. ब्रजेश ने बताया कि इस संदर्भ में मुनादी कराई जा रही है। नोटिस भी जारी किए गए हैं।