एक जुलाई से देश में जीएसटी लागू होने को है। जीएसटी को लेकर कारोबारियों के बीच भी तरह-तरह की बातें हो रहीं है। कोई व्यापारी विरोधी फैसला बता रहा है तो कोई महंगाई बढ़ाने वाला। कारोबारियों की अलग-अलग राय है।
सर्वाधिक परेशान कपड़ा कारोबारी हैं। कपड़ा कारोबारियों पर कर का दायित्व नहीं था। जिसके चलते कपड़ा कारोबारी पूरी एकजुटता के साथ इसका विरोध कर रहे हैं। सोने चांदी के आभूषण पर तीन प्रतिशत कर की दर होने के कारण सराफा कारोबारी भी जीएसटी के पक्ष में नहीं हैं। किराना कारोबारी को अलग-अलग करें होने के कारण परेशानी हो रहीं हैं। ज्यादातर लोग जीएसटी व्यवस्था को लेकर संतुष्ट नहीं हैं। जीएसटी को लेकर कुछ कारोबारियों ने अपनी राय भी प्रस्तुत की है।
कपड़ा कारोबारियों को होंगी दिक्कतें
कपड़ा व्यापारी विनीत माहेश्वरी ने कहा कि कपड़े पर जीएसटी लागू हो जाने के बाद कारोबारियों को दिक्कतें होगी। सबसे ज्यादा परेशानी हिसाब-किताब में होगी। फुटकर कारोबारियों को कपड़े का स्टॉक मेंटेन करना बेहद मुश्किल होगा। कपड़े पर जीएसटी लगाने का कोई औचित्य नहीं है।
व्यापार हित में नहीं जीएसटी
किराना कारोबारी शिव कुमार गुप्ता का कहना है कि जीएसटी कर व्यवस्था को काफी जटिल बनाया गया है। किराने के सामान की दरें अलग-अलग निर्धारित की हैं। जिससे व्यापारियों को काफी दिक्कतें होंगी। जटिल प्रावधानों के चलते जीएसटी कतई व्यापारियों के हित में नहीं हैं। कारोबार पर इसका असर पड़ेगा-