योगी सरकार ने विधायक निधि खर्च करने की नई गाइड लाइन तय कर दी है। नये नियमों के मुताबिक अब माननीय अपनी विधायक निधि के काम एनजीओ से नहीं करा पाएंगे। यही नहीं निधि को निजी स्कूलों की बाउंड्रीवॉल निर्माण और फर्नीचर खरीदने जैसे कामों पर भी खर्च नहीं किया जा सकेगा। माननीयों ने निधि आने के दो महीने बाद भी प्रस्ताव नहीं भेजे हैं।
जिले में दो एमएलसी और चार विधायकों की विकास निधि के करीब पौने चार करोड़ रुपये अप्रैल महीने में आ चुके हैं। अलीगंज विधायक सत्यपाल सिंह राठौर ने तहसील मुख्यालय के अग्निशमन केंद्र के लिए वाहन खरीदने को 35 लाख रुपये खर्च करने का प्रस्ताव भेजा है। जबकि बाकी के तीन विधायक और दोनों एमएलसी ने फूटी कौड़ी खर्च नहीं की है।
सदर विधायक विपिन वर्मा ने बताया कि एटा, सकीट, रिजोर, मलावन में पेयजल उपलब्ध कराने के लिए वॉटर कूलर, जिला मुख्यालय पर प्लास्टिक शौचालय, नाली और खड़ंजे निर्माण कराने के प्रस्ताव तैयार हैं। अब निधि नई गाइडलाइन के हिसाब से खर्च होगी। मारहरा विधायक वीरेंद्र सिंह लोधी ने कहा कि काम काफी कराने हैं। निधि का पैसा सीमित है। जरूरत पर ही खर्च की जाएगी। जलेसर विधायक संजीव दिवाकर ने कहा प्रस्ताव तैयार हैं।
निधि से अब ये नहीं करा पाएंगे काम
जिला ग्राम्य विकास अभिकरण के मुताबिक अब विधायक व्यक्तिगत फायदे के लिए कोई संपत्ति खरीदना, केद्र या राज्य सरकार के आवासीय ग्रह निर्माण, धार्मिक स्थल के लिए भूमि खरीदना, कच्चे मार्ग का निर्माण कराना, सहकारी संस्थानों, वाणिज्यिक संगठन या प्राइवेट संस्थान से संबंधित काम, किसी भी तरह की वस्तु खरीद या भंडारण, स्मारक या स्मारक भवन के लिए अनुदान नहीं होगा।