एटा। नगर में साफ सफाई से लेकर प्रकाश व्यवस्था तक ठप है। विगत दिनों शहर को दूधिया रंग में रंगने के लिए स्ट्रीट लाइटों में तीन हजार से ज्यादा एलईडी बल्ब लगाए गए थे लेकिन कुछ दिन चलने के बाद बल्ब फ्यूज हो गए। हालांकि एलईडी बल्ब गांरटी में थे लेकिन पालिका की ओर से कार्यदायी संस्था का भुगतान न किए जाने के कारण एक भी बल्ब बदला नहीं जा सका। ऐसे में शहर रोशन नहीं हो सका है।
प्रतिवर्ष नगर पालिका की ओर से दीपोत्सव के त्योहार पर शहर को रंग बिरंगी लाइट्स से सजाया जाता है। हर स्ट्रीट लाइट को ठीक किया जाता है। इस बार शहर को दूधिया रोशनी में नहलाने के लिए तीन हजार से ज्यादा प्वाइंट पर एलईडी बल्ब लगाए गए थे लेकिन इनमें से ज्यादातर बल्ब फ्यूज हो गए। इसको लेकर क्षेत्रीय लोग लगातार पालिका को शिकायत दर्ज करा रहे हैं लेकिन पालिका की ओर से कोई सुनवाई नहीं हो पा रही है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि दीपावली का त्योहार भी इस बार अंधेरे में मनाना पड़ सकता है। स्ट्रीट लाइट खराब होने का मामला किसी एक वार्ड अथवा मोहल्ले का नहीं अपितु 25 वार्डों का है। जीटी रोड से लेकर अरुणा नगर, कैलाश गंज, इंद्रपुरी, सुनहरी नगर आदि पॉश कॉलोनियों में भी शाम होते ही अंधेरा छाने लगता है। बताते चले कि शहर में सात हजार 125 प्रकाश बिन्दु है।
साढ़े अठारह लाख का भुगतान नहीं कर रही पालिका
नगर पालिका को एलईडी बल्ब की आपूर्ति नगर की जैन इलेक्ट्रिकल्स ने की है। इसके नगर पालिका पर कुल साढ़े अठारह लाख रुपये बकाया है। इस कारण कार्यदायी संस्था ने फ्यूज एलईडी बल्ब को बदलना बंद कर दिया। पालिका के आर्थिक स्थिति खराब होने की वजह से नगर की कोई भी फर्म सामान देने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही है।
कई बार शिकायत दर्ज करा चुका हूं लेकिन आज तक नगर पालिका की टीम एक स्ट्रीट लाइट को ठीक करने नहीं पहुंची है।
अवधेश यादव, आगरा रोड चुंगी
- जीटी रोड से लेकर गली मोहल्लों तक अंधेरा है। शाम होते ही घर से बाहर निकलने में डर लगता है। यहीं हाल रहा तो दीपावली अंधेरे में ही मनानी होगी।
इशाउल्ला खां, व्यापारी
आंकड़ों पर नजर
7125 कुल प्रकाश बिन्दुओं की संख्या
3289 एलईडी में परिवर्तित हो चुके हैं बिन्दू
25 वार्ड है नगर पालिका क्षेत्र में
18.50 लाख रुपये कार्यदायी संस्था का है पालिका पर अटका
कार्यदायी संस्था का भुगतान न होने की वजह से उसने एलईडी बल्ब बदलने से मना कर दिया है। इस कारण बल्ब फ्यूज हो रहे हैं। वह बदला नहीं जा पा रहा है।
रामकिशन यादव, प्रकाश निरीक्षक