फिरोजाबाद। चूड़ी कारखानों में आठ घंटे काम का मुद्दा इस बार बदली स्थिति में गरमाया रहा है। इससे चूड़ी उद्योग में गतिरोध जैसी स्थिति बन रही है। आठ घंटे से अधिक काम पर बतौर इनाम अलग से पैसा पाने वाले मजदूर ठेकेदारों के होश उड़ गए हैं। जबकि द ग्लास इंड्रस्ट्रियल सिंडीकेट ने आठ घंटे काम चलाने का फैसला सख्ती से लागू करने का दंभ भरा है।
चूड़ी कारखानों में आठ घंटे काम का मुद्दा दशकों पुराना है। इस मुद्दे पर यहां बड़े-बडे़ आंदोलन हुए हैं। आठ घंटे काम के दम पर ही अपराध की दुनिया के एक कुख्यात अपराधी ने रातों-रात यहां श्रमिक नेता की छवि बना ली थी। दरअसल आठ घंटे और उससे अधिक काम को लेकर यहां अलग ही गणित है। यहां कारखानों में मजदूर ठेके पर काम करते हैं। मजूदरों का सीधा वास्ता कारखाना संचालक से न होकर उस ठेकेदार से होता है जो मजदूरों को मजदूर मंडी से उठा कर दैनिक मजदूरी पर काम कराता है। कारखाना संचालक एक मुश्त भुगतान ठेकेदार को देते हैं और और ठेकेदार अलग-अलग मजदूरों को अपने हिसाब से पैसा देता है।
आठ घंटे से अधिक काम कराने का ठेका भी ठेके पर मजदूरों को लाने वाला ठेकेदार लेता है। इसमें चौराहे के मजदूर को उतना ही पैसा मिलता है लेकिन मजदूरों से काम लेने वाले मैनेजर, जगईया, तार वाले और कटईया को कारखाना संचालक बतौर ईनाम अलग से पैसा देते हैं। एक कारखाने में 14 ऐसे लोग (अलग-अलग मजदूरों के ठेकेदार) होते हैं जो कारखाना संचालक से बतौर इनाम रोज दस हजार रुपये कैश पाते हैं। इसकी एवज में मजदूर आठ घंटे से अधिक काम करके उतनी ही मजदूरी पर अधिक उत्पादन देते हैं।
ओवर उत्पादन से कारखाना संचालकों को मोटा मुनाफा होता है। आठ घंटे काम के मुद्दे पर यहां बडे़-बडे़ आंदोलन हुए हैं। आठ घंटे काम के फैसले के बाद उन ठेकेदारों के होश उड़ गए जो रोज हजार रुपये से दो हजार रुपये तक इनाम पाकर चौराहे के मजदूरों से आठ घंटे से अधिक काम लेकर कारखाना संचालकों को लाभ पहुंचा रहे थे।
आठ घंटे काम पर अब तक चूड़ी कारखाना संचालकों की अप्रत्याशित चुप्पी थी, लेकिन एक सप्ताह पहले चूड़ी उद्योग से जुड़े बड़े मुद्दे पर चूड़ी कारखाना संचालकों की पचास साल पुरानी संस्था द ग्लास इंड्रस्ट्रियल सिंडीकेट पहली बार खुल कर सामने आई है। पहली बार सिंडीकेट की बैठक में आम सहमति से फैसला लिया गया कि चूड़ी कारखाना संचालक आठ घंटे से अधिक काम नहीं चलाएंगे। फैसले के साथ सिंडीकेट ने सख्ती यह भी कहा जो इस फैसले को नहीं मानेगा उसके खिलाफ प्रशासन कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है। इसमें सिंडीकेट कारखाना संचालकों की मदद नहीं करेगा।