एडवांस: तरसते गरीब, दफन होती योजनाएं: फोटो
सांसद आदर्श गांव सूरतपुर माफी में धरातल पर नहीं उतरी योजनाएं
30 शौचालयों के निर्माण को नहीं मिली कोई किश्त
अमर उजाला ब्यूरो
एटा। एक साल पहले सांसद आदर्श गांव का तमगा मिला। सोचा था कि गांव को अब हर योजना का लाभ मिलने लगेगा, लेकिन हाथ लगी तो बस मायूसी। आदर्श गांव सूरतपुर माफी के गरीब आज भी योजनाओं का लाभ पाने को तरस रहे हैं, लेकिन सब कुछ दफन हो गया है। सांसद राजवीर सिंह राजू के आदर्श गांव में योजनाओं की हकीकत बेहद दयनीय है। डालते हैं एक नजर....
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सौभाग्य का इंतजार, बीत रहे साल
सांसद आदर्श गांव सूरतपुर माफी के ग्रामीणों को सौभाग्य योजना का इंतजार है। आलम यह है कि अब तक पूरा गांव विद्युतीकृत नहीं है। गांव में पोल लगाने के बाद विद्युत निगम तार डालना भूल गया है। जबकि केंद्र सरकार गांवों को रोशन करने का दावा कर रही है।
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ओडीएफ तो दूर, अनुदान के पड़े लाले
सांसद आदर्श गांव को 150 शौचालय आवंटित किए गए थे। जिनमें से अब तक महज 120 लोगों को पहली किश्त मिली है। जबकि 30 लाभार्थी अनुदान को तरस रहे हैं। ऐसे में गांव को ओडीएफ करने की बात खोखला दावा साबित हो रही है।
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कागजों पर दौड़ता सर्व शिक्षा अभियान
आदर्श गांव में सर्व शिक्षा अभियान की हवा निकल रही है। गांव में प्राथमिक विद्यालय है, लेकिन शिक्षण व्यवस्था पटरी से उतरी हुई है। बच्चों को किताबों का वितरण नहीं हुआ है, तो एमडीएम की गुणवत्ता में भी घालमेल है।
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हैंडपंप के सहारे पेयजल व्यवस्था
गांव को पेयजल मुहैया कराने के लिए हैंडपंप का सहारा है। ग्रामीण बताते हैं कि गांव में लगे 40 हैंडपंपों में से आधे खराब पड़े हैं। जिनको सुधारने की प्रशासन और सांसद ने कोई सुध नहीं ली।
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पेंशन बढ़ा रही टेंशन
आदर्श गांव में पेंशन लोगों के लिए टेंशन बनती जा रही है। गांव के दिव्यांग दंपति कृष्णा और तारा सिंह आज भी पेंशन के लिए तरस रहे हैं। मगर विभाग ने अब तक कोई सुध नहीं ली है।
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चूल्हे पर पकती है रोटी
आदर्श गांव में उज्जवला योजना का हाल भी बेहाल है। घरों में चूल्हे पर खाना पकता है। रसोई गैस सिलेंडर ग्रामीणों के लिए सपना बना हुआ है।
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जननी सुरक्षा योजना हाशिए पर
गांव में जननी सुरक्षा योजना को लेकर भी कोई जागरूकता नहीं है। गांव के लोग प्रसूताओं को लेकर मिरहची की ओर दौड़ लगाते हैं। गांव में आशा भी नहीं पहुंचती हैं।
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