सोरों। प्रदेश सरकार ने वृंदावन और बरसाना के बाद नंदगांव, गोकुल, गोवर्धन, राधाकुंड, बलदेव को तीर्थ घोषित किया गया है। प्रदेश सरकार की इस घोषणा का संत तुलसीदास नगर विकास समिति व तीर्थ पुरोहितों ने स्वागत किया है। अब लोगों ने मुख्यमंत्री से सूकर क्षेत्र सोरों को भी तीर्थस्थल का दर्जा दिलाने की मांग की है।
संत तुलसीदास नगर विकास समिति के संयोजक डा. प्रभाकर पाराशरी ने कहा कि सूकरक्षेत्र सोरों को तीर्थस्थल घोषित करने की मांग लंबे अरसे से की जा रही है। यहां लगभग प्रति वर्ष 25 लाख से अधिक श्रद्धालु गंगा स्नान करने व अपने दिवंगतजनों के अस्थि विसर्जन के लिए आते हैं। केए कालेज के वरिष्ठ प्राध्यापक डा. राधाकृष्ण दीक्षित का कहना है कि ब्रज के तीर्थों का विकास किया जाना योगी सरकार का स्वागतयोग्य कदम है। लेकिन सोरों को तीर्थ बनाने की मांग उपरोक्त तीर्थों से काफी पुरानी है। सरकार को इस ओर भी ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि दो पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह, राजनाथ सिंह भी कई बार सोरों को तीर्थ का दर्जा देने का आश्वासन पूर्व में दे चुके हैं। वरिष्ठ तीर्थ पुरोहित पं.भारत किषोर दुबे का कहना है कि गंगा वराह की इस पवित्र तीर्थ स्थली की गोद में महान संतों, विचारकों, विद्वानों ने प्रवास कर तप किया है। कपिल मुनि, भागीरथ, गुरू नानक देव, महाप्रभु बल्लभाचार्य, दयानंद सरस्वती, गोस्वामी तुलसीदास, नंददास आदि महापुरुषों की लंबी श्रंखला है।
लोग अब सवाल उठा रहे हैं कि जनसंघ के समय से भाजपा का गढ़ रहा सोरों तीर्थस्थान की उपेक्षा का अंतहीन सिलसिला अब कब खत्म होगा। सांसद, विधायक, चेयरमैन भाजपा का साथ ही केंद्र में व प्रदेश में भाजपा की सरकार फिर भी भाजपा के इस गढ को जानबू़झकर निराशा के गर्त में कब तक ढकेला जाता रहेगा। बाशिंदो ने शीघ्र सोरों को तीर्थ स्थल घोषित किए जाने की मांग की हैं, जिससे यहां का विकास तेजी से हो सके।