मैनपुरी। इसे सरकार की विडंबना कहें या उन लोगों की बदकिस्मती जो अब हमारे बीच नहीं हैं। आसरा आवास के इंतजार में पांच लोग इस दुनिया को छोड़ कर चले गए लेकिन सरकार की लेटलतीफी के चलते स्वयं की छत का सपना देख रहे इन लोगों को अभी तक छत नसीब नहीं हो सकी।
सपा सरकार ने वर्ष 2012 में गरीबों को छत देने के लिए आसरा आवास योजना चलाई थी। इसके तहत शहरी क्षेत्र में गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वालों को आवास उपलब्ध कराए जाने थे। वर्ष 2018 आने के बाद भी अभी लोगों को आवास नहीं दिए गए हैं। जब प्रशासन की ओर से जांच की गई तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।
जांच में पाया गया कि आवास के लिए 440 लोगों ने आवेदन किया था। इसमें 82 लोग अपात्र मिले हैं। 62 लोगों ने आसरा आवास की आस छोड़ स्वयं का मकान बना लिया। वहीं 15 लोग शहर से पलायन कर गए हैं। हद तो तब हो गई जब जांच में पांच लोग इस दुनिया में नहीं मिले। इनके परिवारीजनों ने भी आवास की आस को छोड़ दिया है।
जिले में आसरा आवास के लिए मिला बजट
-जिले में आसरा आवास बनाने के लिए लगभग 10 करोड़ रुपये की धनराशि उपलब्ध कराई गई थी। शहर के इटावा रोड पर बने आसरा आवास में 33 ब्लाक बनाए गए हैं। एक ब्लाक 12 अवासों को बनाया गया है।
जिले में बनने वाले आवासों की संख्या
-आसरा आवास योजना के तहत जिले में 396 आवास बनाए गए हैं। इसके लिए शहरी क्षेत्र में रहने वाले गरीब लोगों से अवेदन भी मांगे गए थे। इस दौरान 440 लोगों ने आवास के लिए आवेदन किए थे।
जांच के बाद मांगे गए आवेदन
-जांच में 82 लोग कम होने के बाद डूडा कार्यालय की ओर से एक फिर से आवेदन मांगे गए। जो 26 दिसंबर से पांच जनवरी तक भरे गए। इस दौरान 169 लोगों ने आवेदन किया है। इनकी भी जांच कराई जा रही है।
इन लोगों की हुई मौत
नाम पिता का नाम निवासी
शमी अब्दुल हमीद गुलाब बाग
राम बहादुर विजय लाल वंशीगौरा
जगत सिंह मेवाराम हिंदपुरम कालोनी
तेजराम लाला राम वंशीगौरा
राजू सतेंद्र सिंह राजा का बाग
जांच में 82 लोग अपात्र पाए गए हैं। इनके स्थान पर नए 169 आवेदन भरे गए हैं। जल्द ही जांच के बाद आवासों का आवंटन कर दिया जाएगा।
एमए खान, परियोजना अधिकारी