मैनपुरी। पिछले वर्ष आलू की फसल में बड़ा नुकसान उठा चुके किसानों को आलू की अगैती फसल से भी राहत नहीं मिल रही है। मंडी में किसान को आलू का सही भाव नहीं मिल रहा है, वहीं आलू फुटकर दुकानदारों तक पहुंचकर दो गुने दाम पर बिक रहा है। छह से आठ रुपये प्रति किलो नये आलू बिक्री की आस लगाए किसान के साथ में तीन से चार रुपये प्रति किलो ही आ रहे हैं। इसमें भाड़ा और मंडी शुल्क भी देना पड़ रहा है।
3.362 लाख मीट्रिक टन आलू का किया गया था भंडारण
मैनपुरी जिले की आलू उत्पादन में विशेष पहचान है। आलू यहां की प्रमुख फसल भी है। बीते वर्ष आलू किसानों को काफी नुकसान हुआ। भाव न मिलने के कारण किसानों ने शीतगृहों से आलू नहीं छुड़ाया। मजबूरी में शीतगृहों संचालकों को आलू फेंकना पड़ रहा है। जिले के 41 शीतगृहों में बीते वर्ष 3.362 लाख मीट्रिक टन आलू का भंडारण किया गया था।
बीते वर्ष घाटा झेल चुके किसानों को आलू की अगैती फसल से काफी उम्मीद थी। इस बार अगैती फसल भी किसानों को राहत नहीं दे रही है। स्थिति यह है कि बीते वर्षों में मौजूदा समय में छह सौ से आठ सौ रुपये प्रति क्विंटल बिकने वाला किसान का नया आलू, वर्तमान में साढ़े तीन सौ से चार सौ रुपये प्रति क्विंटल ही बिक रहा है। इससे अगैती फसल में भी किसान को नुकसान उठाना पड़ रहा है।
मंडी एसोसिएशन के अध्यक्ष उपदेश यादव का कहना है कि बीते वर्षों में कच्ची खोद तक शीतगृहों में आलू खत्म हो जाता था। इस कारण बाजार में नए आलू की मांग अधिक रहती थी। इससे किसान को छह से आठ रुपये प्रति किलो का भाव मिल जाता था।
बीते वर्षों में इसी सीजन में छह से आठ रुपये किलो नया आलू बिकता रहा है। इस वर्ष मंडी में किसान का आलू तीन से चार रुपये प्रति किलो ही बिक रहा है। इससे नई फसल में भी नुकसान हो रहा है। ओमप्रकाश, किसान लालपुर
फुटकर मंडी में भले ही आलू दस रुपये किलो बिक रहा है, किसान का आलू तो तीन से चार रुपये किलो में ही खरीदा जा रहा है। स्थिति यही रही तो इस वर्ष भी किसानों को नुकसान होगा। धर्मेंद्र कुमार, किसान लालपुर
इस वर्ष जिले में आलू की बंपर पैदावार हुई है और दूसरी ओर अभी से भाव डाउन है। अगर स्थिति यही रही तो बीते वर्ष की तरह इस वर्ष भी आलू किसान के लिए घाटे का सौदा साबित होगा। रिंकू, किसान सगौनी
भाव अच्छा मिलेगा, इस उम्मीद के साथ आलू की अगैती फसल की थी। सोमवार को मंडी में आलू लेकर पहुंचे तो चार सौ रुपये प्रति कुंतल का भाव मिला। इसमें भी ट्रैक्टर का भाड़ा और मंडी के खर्चे देने पड़े। होरीलाल, किसान सगौनी