मैनपुरी। सर्दी के मौसम में अधूरी तैयारियां जनपद के लोगों के लिए मुसीबत बन रही हैं। जिला प्रशासन ने इनके लिए कोई तैयारी नहीं की है। वहीं एक ओर अस्पताल प्रशासन की लापरवाही से मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। वहीं, दूसरी तरफ रैन बसेरा आदि की व्यवस्था न होने के कारण भी लोग परेशान हैं।
अगर हम जिला अस्पताल की बात करें तो यहां भी मरीजों को सर्दी से बचाव के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। बाल रोग वार्ड की खिड़कियों में लगे सीसे टूटे हुए हैं, जिससे सर्दी के मौसम में सर्द हवाएं अंदर तक पहुंच रही हैं। यहां बाल रोगियों को एक कंबल में सर्दी से बचाना मुश्किल हो गया है। यहां मरीजों के साथ आने वाले तीमारदारों के बचाव के लिए भी कोई इंतजाम नहीं है।
जिला अस्पताल में आने वाले तीमारदार रात भर ठिठुरते रहते हैं। तीमारदारों को अपने साथ मरीजों के लिए भी रजाई आदि लाना पड़ रहा है। तीमारदारों के ठहरने की जिला अस्पताल में कोई व्यवस्था नहीं है। परिसर में इधर-उधर जमीन में ही लेटकर उन्हें रात गुजारनी पड़ रही है।
मैनपुरी। वर्ष 2010 में विधायक निधि से जिला अस्पताल प्रांगण में ही एक रैन बसेरा का निर्माण कराया गया था। जनपद में सर्दी का प्रकोप होने के बाद अभी तक यह तीमारदारों या जनता के लिए नहीं खोला गया है। यहां ताला लटक रहा है और तीमारदार और नगर में आने वाले लोग सर्दी से बचाव के लिए भटकते रहते हैं।
मैनपुरी। जिला अस्पताल प्रशासन ने भी पांच वर्ष पूर्व जिला अस्पताल में एक रैन बसेरा का निर्माण कराया था, लेकिन इसमें अस्पताल का कबाड़ भरा हुआ है। इससे यहां आने वाले तीमारदारों को दिक्कतों को सामना करना पड़ रहा है।
सर्दी के बीच नगर पालिका ने नगर के जिला अस्पताल, जिला महिला अस्पताल, बस स्टैंड, तांगा स्टैंड, घंटाघर चौराहा, संत बसंता चौराहा, बड़ा चौराहा, भांवत चौराहा, रेलवे स्टेशन, आगरा रोड पुलिस चौकी के पास, मदार दरवाजा, कोतवाली आदि स्थानों पर अलाव की व्यवस्था की है। हालांकि जिस दिन सर्दी अधिक होती है उसी दिन अलाव जलाए जा रहे हैं।