मथुरा। नेशनल हाईवे-2 को सिक्सलेन बनाने का काम पांच साल से चल रहा है। आगरा से फरीदाबाद तक कई जगह यह प्रोजेक्ट फंसा हुआ है। हालांकि हाईवे अथॉरिटी 2018 में इसे पूरा करने का दावा कर रही है। सुस्त निर्माण के चलते कई जगह लोगों को जाम का झाम भी झेलना पड़ रहा है।
हाईवे अथारिटी ने 16 अक्तूबर 2012 में नेशनल हाईवे-2 को आगरा से फरीदाबाद तक सिक्सलेन बनाने का काम शुरू किया था। इस प्रोजेक्ट को 15 मई 2016 को पूरा किया जाना था लेकिन अभी तक आधा अधूरा है।179.50 किलोमीटर के इस प्रोजेक्ट पर शुरुआत में तो काम तेजी के साथ हुआ लेकिन बाद में पिछड़ता चला गया। 8 रेलवे ओवरब्रिज, 13 फ्लाईओवर ब्रिज, 14 व्हीकल अंडरपास, 9 पब्लिक अंडरपास, 13 माइनर ब्रिज, सहित कुल 66 पुल बनाए जाने थे।
इनमें से अब तक 50 पुलों को ही पूरे तौर पर चालू किया जा सका है। कोसीकलां छाता से पहले दौताना, चौमुहां, जीएलए, आझई कट, फरह, रिफाइनरी सहित एक दर्जन से अधिक पुलों का काम अब तक पूरा नहीं हो सका है। 1928.22 करोड़ की लागत से बनने वाले सिक्सलेन हाईवे के बरसाती पानी निकासी के लिए दोनों ओर की नालियां को अधूरा छोड़ दिया है।
‘सिक्सलेन हाईवे के निर्माण में बिजली की लाइन हटाने, अतिक्रमण हटाने, व जमीन अधिग्रहण में स्थानीय प्रशासन का सहयोग नहीं मिल पाया। इस वजह से काम में देरी हुई। जन सुविधाओं को देखते हुए पुलों को चालू किया जा रहा है। आगरा, कोसीक लां व मथुरा में कुछ काम बचा है’
-सुरेश कुमार, उपमहाप्रबंधक एनएचएआई
एक्सीडेंटल जोन को नहीं कोई प्लानिंग
मथुरा। एक्सीडेंटल जोन बने एटीवी कट, नरहौली चौराहा, भरतपुर मोड़, एआरटीओ तिराहा, नवादा कट सहित दर्जनों ऐसे स्थान हैं जहां सबसे ज्यादा एक्सीडेंट होते हैं और अक्सर जाम लगता है लेकिन एनएचएआई के इंजीनियरों ने कोई प्लानिंग नहीं की है।