फिरोजाबाद। गरीब परिवारों के बच्चों को निजी विद्यालयों में पढ़ाने का सपना सरकार ने दिखाया। तमाम झंझटों के बाद करीब 700 बच्चों के प्रवेश को हरी झंडी दी गई। अब वर्ष समाप्त होने को है, लेकिन बच्चों की अभीतक फीस, कॉपी-किताबों और यूनीफार्म का इंतजाम हो नहीं सका है। विभाग से धनराशि नहीं भेजी जा सकी। विभाग को यह भी नहीं पता कि कितने बच्चे विद्यालय जा रहे हैं।
शिक्षा का अधिकार अधिनियम में अलाभित समूह और गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों के बच्चों का निजी विद्यालयों की 25 फीसद सीटों पर प्रवेश होना था। शासन स्तर से जोर दिया गया, तमाम इंतजाम किए गए। आनलाइन प्रार्थना पत्र लिए गए। सैकड़ों बच्चों ने आवेदन किए थे, जांच पर जांच हुई और फिर अंत में 700 बच्चों के प्रवेश को हरी झंडी दी गई।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय से बच्चों की सूची विद्यालयों को भेज दी गई। बच्चों के अभिभावकों के खातों में पांच हजार रुपये जाने थे। ताकि वे कॉपी-किताब और स्कूल ड्रेस खरीद सकें। विभाग ने बच्चों की सूची भेजकर इतिश्री कर ली। अब यह तक नहीं पता कि कितने बच्चों ने प्रवेश लिया।
खास बात यह है कि नवंबर समाप्त होने वाला है। निजी विद्यालयों में बच्चों की पढ़ाई आधे से ज्यादा हो गई, लेकिन अभी इन बच्चों की नहीं फीस भेजी गई और न ही कॉपी-किताबों का इंतजाम हो सका। ऐसे में बच्चों के अंदर हीनता आ रही है।
देखा जाए तो इन मासूमों की किस्मत पर बदकिस्मती का ताला पड़ गया है। जिला समन्वयक केपी सिंह ने बताया कि स्कूलों से सूचनाएं मांगी जा रही है कि कितने दाखिले किए गए। सूचना आते ही धनराशि खातें में भेज दी जाएगी।