फिरोजाबाद। कांच की रंग-बिरंगी चूड़ियों के नाम से मशहूर शहर फिरोजाबाद को वर्ष 1954 में नगर पालिका की सौगात मिली थी। नगर पालिका की अपनी कोई बिल्डिंग नहीं होने से 10 साल तक पालिका कार्यालय शास्त्री मार्केट में संचालित हुआ। 1964 में आगरा गेट पर नगर पालिका बिल्डिंग स्थापित हुई। इसके बाद चार अगस्त 2014 में नगर पालिका को निगम की सौगात मिली।
फिरोजाबाद शहर पहले बहुत छोटा था। शहर की दो से ढाई लाख आबादी थी। फिरोजाबाद को 1954 में नगर पालिका का दर्जा मिला। आगरा गेट पर जहां आज नगर निगम की बिल्डिंग है, यहां वर्षों पूर्व सब्जी मंडी लगती थी। नगर पालिका के लिए उक्त स्थल का चयन हुआ।
1964 में नगर पालिका कार्यालय आगरा गेट पर स्थानांतरित हुआ। 1968 पालिका गेट का उद्घाटन हुआ। नगर पालिका बनने के बाद वर्ष 1972 से 1989 तक लगातार 17 साल सुपर सीट रही। नगर पालिका में प्रशासक और अधिशासी अधिकारी ही सभी व्यवस्थाएं संभालते थे।
नगर पालिका परिषद में पूर्व में जनता द्वारा चुने गए सभासदों द्वारा बहुमत के आधार पर चेयरमैन चुना जाता था। 1995 में रमेशचंद्र चंचल पहले ऐसे चेयरमैन बने, जिन्हें जनता ने चुना। इसके बाद से लगातार जनता द्वारा चेयरमैन का चुनाव होता रहा है।
शासन ने सुहागनगरी की जनता की बहुप्रतीक्षित मांग को पूरी करते हुए नगर पालिका परिषद को उच्चीकृत करते हुए नगर निगम का दर्जा दिया। नगर निगम की घोषणा होने के बाद आठ अगस्त को बोर्ड भंग कर दिया गया। नगर निगम बने तीन साल से अधिक समय हो गया है। तीन साल के बाद नगर निगम का पहला चुनाव होने जा रहा है। शहर की जनता पहली बार मेयर और पार्षदों का चुनेगी।
नगर पालिका से नगर निगम का दर्जा मिलने से अब तक तीन नगर आयुक्त की तैनाती हुई है। प्रथम नगर आयुक्त के रूप में रामऔतार रमन की तैनाती हुई थी। उनके सेवानिवृत्त होने पर दूसरे नगर आयुक्त कमलेश कुमार सिंह बने। शासन ने 21 अक्तूबर को मुरादाबाद स्थानांतरण कर दिया। मंगलवार को नगर निगम में तीसरे नगर आयुक्त इटावा में तैनात एडीएम वित्त जितेंद्र कुमार चार्ज ग्रहण करेंगे।