मैनपुरी। गंभीर अपराधों के विचाराधीन मुकदमों में सरकारी गवाही समय से नहीं होने के कारण अदालतों में मुकदमे लंबित पड़े हैं। सरकारी गवाह अदालत में गवाही देने में लापरवाही बरतते हैं। गवाही न होने से 105 मुकदमे निस्तारण के लिए लंबित हैं। अदालत के कारण बताओ नोटिस को सरकारी गवाह इसे गंभीरता से नहीं लेते हैं।
मुकदमे की सुनवाई पुलिस की चार्जशीट के बाद शुरू होती है। सरकारी गवाहों में विवेचना अधिकारी, पुलिस कर्मी तथा डॉक्टर महत्वपूर्ण होते हैं।
गवाही का समय आने तक कई गवाहों का जिले से तबादला हो जाता है। दूसरे जिले में तैनात सरकारी गवाह समय पर अदालत नहीं आते हैं। सुनवाई के दौरान अदालतों के कारण बताओ नोटिस तक सरकारी गवाह गंभीरता से नहीं ले रहे हैं।
अपर जिला जज की अदालत में विचाराधीन दलित महिला से दुष्कर्म के मामले में दरोगा एक साल से गवाही के लिए नहीं आ रहे हैं। कुर्रा क्षेत्र के दलित युवक की हत्या में भी दरोगा गवाही देने के लिए आठ माह से अदालत में नहीं आ रहे हैं। दोनों के खिलाफ कारण बताओ नोटिस भी अदालत से जारी हो चुका है।ॉ
डीजीसी फौजदारी सुभाष चंद्र यादव ने बताया कि मुकदमों के शीघ्र निस्तारण के लिए सरकारी गवाही समय पर जरूरी है। समय से गवाही नहीं होने पर मुकदमा लंबित होता है। पीड़ित को न्याय पाने में देरी होती है। कभी-कभी तो मुकदमे के अन्य गवाह मर तक जाते हैं। सरकारी गवाही समय पर कराने के लिए डीएम तथा एसपी को लिखा गया है।