आगरा। नगर निगम के अधिकारी निगम की माली हालत सुधारने में जुटे हैं। टैक्स की वसूली पर पूरा जोर दिया जा रहा है, उधर शासन ने 14 वें वित्त आयोग की राशि में कटौती का प्रस्ताव देकर निगम के अफसरों की नींद उड़ा दी है। अधिकारी अब लखनऊ में होने वाली बैठक की तैयारियों में जुटे हैं। ताकि वहां प्रमुख सचिव के समक्ष निगम की वित्तीय स्थिति की तस्वीर पेश कर सकें।
वित्तीय वर्ष 2016-17 में नगर निगम को वित्त आयोग से करीब 150 करोड़ रुपये मिले थे। इसमें करीब 140 करोड़ रुपये वेतन में चले गए। अब सवाल यह है कि शहर के 90 वार्डों में 10 करोड़ से क्या विकास कार्य कराए जा सकते हैं। ऊपर से स्टांप ड्यूटी का पैसा भी नहीं मिल पाया। निगम की टैक्स से आय करीब 25-30 करोड़ रुपये है।
सदन ने निगम की आय बढ़ाने का प्रस्ताव पास कर दिया था। इसके चलते अधिकारी आय में इजाफा करने के लिए पूरी ताकत से जुटे हैं। नगर आयुक्त अरुण प्रकाश की मानें तो वित्तीय वर्ष 2017-18 के इन चार महीनों में पिछले वर्ष की तुलना में करीब 75 फीसदी टैक्स की वसूली हो चुकी है, लेकिन परेशानी शासन ने बढ़ा दी है।
प्रमुख सचिव नगर विकास ने प्रस्ताव दिया है कि एफएफसी की धनराशि में कटौती की जा सकती है। उन्होंने प्रदेश के सभी नगर आयुक्तों से सुझाव मांगा है। ऐसे में अफसरों का कहना है कि नगर निगम की आय पहले से कम है। ऐसे में एफएफसी का पैसा कम हो जाएगा तो निगम के सामने वित्तीय संकट खड़ा हो जाएगा।