आगरा। आगरा रेल मंडल के स्टेशनों पर खानपान व्यवस्था बदहाल है। यहां तक कि ए श्रेणी के स्टेशनों में शुमार आगरा कैंट स्टेशन पर भी खानपान की गुणवत्ता मानकों को मुंह चिढ़ाने वाली है। जनता को खाना भी यदाकदा ही मिल पाएगा। न तो वेंडरों पर वर्दी है और न ही वे नेम प्लेट लगाते हैं। ऐसे में अवैध वेंडरों की पहचान कर पाना बेहद मुश्किल है। वाणिज्य विभाग की अनदेखी के कारण यात्रियों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।
आगरा फोर्ट रेलवे स्टेशन पर हालात ज्यादा खराब हैं। खानपान की सामग्री बनाते वक्त साफ सफाई का भी ध्यान नहीं रखा जाता है। आगरा कैंट स्टेशन पर 20 से अधिक स्टाल और ट्रालियां हैं। पूरे दिन में 350 से अधिक यात्री ट्रेनों का आवागमन स्टेशन पर होता है।
स्टेशन पर अकसर ही खानपान की वस्तुओं के दाम रेट लिस्ट से ज्यादा वसूले जाते हैं। चाय सात रुपये की है, मगर 10 रुपये वसूलते हैं। रेल नीर बहुत ही कम स्टालों पर बेचा जाता है, क्योंकि उसकी कीमत कम है।
कैंट स्टेशन पर एक फर्म अपने स्टालों की आड़ में 100 से अधिक वेंडरों को अवैध रूप से ट्रेनों में खानपान की सामग्री बिकवाती है। आगरा फोर्ट रेलवे स्टेशन पर तो खानपान की चेकिंग शायद ही कभी होती हो, यहां तकरीबन 300 अवैध वेंडर हैं, जोकि ट्रेनों और प्लेटफार्म पर खाद्य सामग्री बेचते हैं।
इनमें खीरा, पेटीज, वेज बिरयानी, समोसे, बर्गर आदि कई तरह के आइटम हैं, लेकिन इनकी गुणवत्ता बेहद खराब होती है। ज्यादातर ट्रेनों की पेंट्री कार से परोसा जाने वाला भोजन भी अधोमानक होता है। मथुरा स्टेशन पर पिछले दिनों मथुरा स्टेशन पर घटिया किस्म के पेड़े बेचे जाने की शिकायत की गई थी।
क्षेत्रीय रेल परामर्शदात्री समिति के सदस्य राधाकृष्ण लवानिया का कहना है कि आगरा फोर्ट, आगरा कैंट, मथुरा स्टेशनों पर घटिया खाद्य सामग्री बेची जा रही है। उन्होंने इसकी शिकायत उत्तर मध्य रेलवे के महाप्रबंधक से की है। रेलवे के वाणिज्य प्रबंधक डा. संचित त्यागी का कहना है कि खानपान की निरंतर चेकिंग की जाती है। शिकायत पर कार्रवाई की जाती है।