ओलंपिक दिवस पर विशेष:
कासगंज।
जिले के खिलाड़ी कई राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय खेलों में हिस्सा ले चुके हैं, लेकिन संसाधनों का अभाव इन खिलाड़ियों को आगे नहीं बढ़ने देता। भविष्य की दुश्वारियों को देखते हुए खिलाड़ी खेल से मुंह मोड़ने को विवश हो जाते हैं।
यहां कबड्डी के कई खिलाड़ी मौजूद हैं। यहां के खिलाड़ी नेपाल के परंपरागत ओलंपिक खेल संघ की ओर से आयोजित कबड्डी प्रतियोगिता में हिस्सा ले चुके हैं। पिछले वर्ष नेपाल में आयोजित प्रतियोगिता में भारत की टीम ने स्वर्ण पदक जीता था। इस टीम में जिले के कबड्डी खिलाड़ी अंशुल पाल ने हिस्सा लेकर बेहतर खेल का प्रदर्शन किया।
जिले के दूसरे खिलाड़ी मोहित कुमार अंतर्राष्ट्रीय पंजा कुश्ती प्रतियोगिता 2016 में हिस्सा ले चुके हैं। यह प्रतियोगिता देश में ही आयोजित हुई और मोहित ने साउथ अफ्रीका के खिलाड़ी को हराकर रजत पदक जीता। अंशुल और मोहित की तरह जिले में पंजा कुश्ती और कबड्डी सहित अन्य खेलों के खिलाड़ी मौजूद हैं। जिन्हें ने तो प्रैक्टिस करने का कोई स्थान मिल पाता है और न ही कोई अन्य सुविधा। यहां बनाया गया मिनी स्टेडियम भी बदहाल है। स्टेडियम में कक्ष और बाउंड्रीवाल ही दिखाई देती है।
खिलाड़ी को मिले सुविधाएं
अंतर्राष्ट्रीय पंजा कुश्ती खिलाड़ी मोहित कुमार का कहना है कि जिले में खेल की कोई सुविधा नहीं है। इससे खिलाड़ी प्रोत्साहित नहीं हो पाते। प्रतिभाओं को सांसद और विधायक भी प्रोत्साहित नहीं करते। खेल मंत्रालय से खिलाड़ियों को न तो भत्ता तो मिलता है और न ही कोई रियायत मिल पाती है। कोच हो तो खिलाड़ियों का प्रदर्शन और बेहतर हो सकता है।
खिलाड़ियों को निखारने की जरूरत
कासगंज। कबड्डी खिलाड़ी अंशुल पाल का कहना है कि खिलाड़ियों की कहीं कोई कमी नहीं है,बस कमी है ऐसी प्रतिभाओं को निखारने की। खिलाड़ियों में मेहनत करने की क्षमता है, लेकिन उन्हें न तो खेल का माहौल मिलता है और न ही प्रशिक्षण। खिलाड़ियों को भत्ते से लेकर अन्य सुविधाएं दी जाएं जिससे वे अपनी प्रतिभा को निखार सकें।