मथुरा। सात दिन की छुट्टी लेकर एक सिपाही महंत बनने पहुंच गया। उसने खाकी वर्दी उतारी और संतों वाले वस्त्र धारण कर लिए। पहनावा और आचार-विचार से खुद को एक बड़ा संत साबित करने वाले इस सिपाही ने महंत के लिए अपनी दावेदारी भी कर दी, लेकिन मामला तब खुल गया जब उसके मोबाइल पर थाने के मुंशी का फोन आया। मुंशी से बातचीत करते वक्त उसने रवानगी और आमद जैसे शब्द बोले तो वहां खड़े थानाध्यक्ष मामला समझ गए।
संतों का चोला धारण करने वाले सिपाही का नाम रामअवतार है। वह नोएडा के सेक्टर 24 के थाने में तैनात है। राअवतार 9 जून से छुट्टी पर चल रहा है। 16 जून को थाने पर पहुंचकर उसे आमद करानी थी लेकिन वह पहुंचा ही नहीं। सिपाही रामअवतार गेरुवा कपड़े पहनकर मथुरा में उदासीन आश्रम पर पहुंच गया। रामअवतार महंत बनना चाह रहे थे। वह आश्रम में मौजूद पुलिस से भी वार्ता कर रहा था।
पुलिस उसे प्रभावशाली संत समझ रही थी। चूंकि आश्रम में महंत की गद्दी को लेकर कुछ विवाद हो रहा था लिहाजा पुलिस वाले भी उसे ही बार-बार बुलाकर मामले को शांत कराने के लिए कह रहे थे। लेकिन मुंशी से फोन पर बात करते ही पुलिस ने उसे पहचान लिया कि वह जरूर पुलिस महकमे से जुड़ा है। उधर, इसकी भनक लगते ही रामअवतार वहां से दाएं-बाएं हो गया।
सात दिन से छुट्टी पर चल रहा है सिपाही
नोएडा के एसपी सिटी अरुण कुमार सिंह का कहना है कि सिपाही सात दिन की छुट्टी पर था। उसके बारे में मथुरा पुलिस से रिपोर्ट मांगी गई है।
मैं तो भटके लोगों को राह दिखाने आया था
सिपाही रामअवतार का कहना है कि वह लंबे समय से उदासीन आश्रम से जुड़ा हुआ है। उसने बताया कि वह भटके लोगों को राह दिखाने आया था। अब आश्रम में गद्दी संत को सौंप दी गई है लिहाजा अब वह चला जाएगा।