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UP: 128 पेड़ काटने पर लगाने होंगे चार हजार, 10 साल तक करनी होगी देखभाल; रेलवे ट्रैक के लिए सीईसी की सिफारिश

Sun, 09 Nov 2025 12:26 PM IST
अरुन पाराशर अमित कुलश्रेष्ठ, अमर उजाला, आगरा

सार

सीईसी ने अक्तूबर में संयुक्त निरीक्षण किया, जिसके बाद पेड़ों को बचाने के लिए रेलवे ट्रैक के अलाइनमेंट में बदलाव किया गया। इससे 209 की जगह कुल 128 पेड़ों को काटने की जरूरत ही पड़ी। 
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पेड़
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विस्तार
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जवाहरपुर थर्मल पाॅवर प्रोजेक्ट तक कोयला और तेल पहुंचाने के लिए न्यू बरहन से एटा के शिवाला टेहू स्टेशन तक रेलवे ट्रैक प्रस्तावित है। इस ट्रैक के निर्माण में 128 पेड़ बाधा बने हुए हैं। सेंट्रल इंपावर्ड कमेटी (सीईसी) ने रेलवे ट्रैक के निर्माण के लिए 128 पेड़ों को काटने की अनुमति देने की सिफारिश सुप्रीम कोर्ट से की है। इसके एवज में 4 हजार पेड़ लगाने होंगे। 10 साल तक इन पेड़ों के रखरखाव का खर्च उठाना होगा और एक भी पेड़ ज्यादा काटा तो एक लाख रुपये प्रति पेड़ जुर्माना रेलवे पर लगाया जाएगा।
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सेंट्रल इंपावर्ड कमेटी के चेयरमैन सिद्धांत दास ने ताज ट्रेपेजियम जोन (टीटीजेड) में प्रस्तावित रेलवे लाइन के निर्माण की मंजूरी देने की सिफारिश सुप्रीम कोर्ट से की है। उन्होंने अपनी रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल की है। इस पर 11 नवंबर को सुनवाई होनी है। उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम के प्रोजेक्ट मैनेजर अजय कुमार ने पेड़ों को काटने के एवज में प्रस्तावित रेलवे लाइन के किनारे चार मीटर चौड़ी पट्टी में 4 हजार पेड़ लगाने का प्रस्ताव सीईसी के सामने रखा था। निगम ने कहा है कि 660 मेगावाट क्षमता की दो यूनिट वाले जवाहपुर थर्मल प्लांट के लिए हर दिन 9 रैक कोयला चाहिए।

209 पेड़ काटने मांगी थी अनुमति, सर्वे में बदला अलाइनमेंट
जवाहर तापीय विद्युत परियोजना में न्यू बरहन से शिवाला टेहू स्टेशन तक प्रस्तावित रेलवे ट्रैक निर्माण के लिए 209 पेड़ काटने की अनुमति मांगने के लिए सेंट्रल इंपावर्ड कमेटी को आवेदन किया गया था। सीईसी ने अक्तूबर में संयुक्त निरीक्षण किया, जिसके बाद पेड़ों को बचाने के लिए अलाइनमेंट में बदलाव किया गया। इससे 209 की जगह कुल 128 पेड़ों को काटने की जरूरत ही पड़ी। इनमें आगरा में 119 पेड़ और हाथरस में 9 पेड़ काटने होंगे। वहीं 19 पेड़ों का स्थान बदला जाएगा। यह दोनों ही जगह ताज ट्रेपेजियम जोन का हिस्सा हैं।
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रेलवे ट्रैक के बायीं ओर चार मीटर चौड़ी पट्टी में लगेंगे पौधे
सेंट्रल इंपावर्ड कमेटी के निरीक्षण में वह जगह भी देखी गई, जहां 128 पेड़ काटने के बाद 4 हजार पेड़ लगाए जाएंगे। इसके लिए प्रस्तावित ट्रैक के बायीं ओर 4 मीटर चौड़ी पट्टी चुनी गई है। यह कुल 4099 मीटर लंबी है, जिसमें देसी प्रजातियों के पौधे लगाए जाएंगे। सीईसी के सामने हर पेड़ का ब्योरा दिया गया है, जिसे सुप्रीम कोर्ट में दाखिल रिपोर्ट में शामिल किया गया है। इन पेड़ों में नीम, पीपल, गूलर, आम, शीशम, कंजी, बेर और शहतूत के साथ बबूल शामिल हैं।
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सीईसी की सिफारिशें
- बरहन से शिवाला टेहू तक प्रस्तावित रेलवे ट्रैक निर्माण में प्रतिपूर्ति वनीकरण में 4 हजार देसी पौधे लगाने होंगे।
- 10.50 किमी लंबी हरित पट्टी पर 128 पेड़ काटने के एवज में दस गुना 1280 पेड़ों के साथ ये पौधे लगाए जाएंगे।
- दस साल तक 4 हजार पौधों के पेड़ बनने तक रखरखाव करना होगा, गर्मी में पानी की पूरी व्यवस्था करनी होगी।
- पेड़ों को नुकसान न पहुंचे, इसके लिए दो फीट ऊंची कंक्रीट दीवार के ऊपर 6 फीट ऊंची चेन लिंक बाड़ लगानी होगी।
- चार हजार पेड़ लगाने, बाड़ लगाने, रखरखाव का पूरा खर्च अनुमति लेने से पहले डीएफओ के पास जमा कराना होगा।
- टीटीजेड अथॉरिटी के चेयरमैन निगरानी करेंगे, अगर एक पेड़ भी ज्यादा काटा गया तो एक लाख रुपये प्रति पेड़ का जुर्माना वसूला जाएगा।



 
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