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खाद की किल्लत, किसान परेशान

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एटा। जिले में यूरिया खाद का स्टॉक खत्म हो चुका है। ऐसे में निजी दुकानदार जमकर मौके का फायदा उठा रहे हैं। फसल में खाद की आवश्यकता के कारण निजी दुकानदार चोरी छिपे दूसरे जिलों से खाद लाकर अधिक दामों पर किसानों को बेच रहे हैं। वहीं फसल की चिंता में परेशान किसान भी अधिक दाम पर खाद खरीदने पर मजबूर है।
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किसानों की समस्या खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। पहले बारिश का अभाव और अब खाद का। जिले में 2.65 लाख किसानों में से करीब दो लाख किसानों ने 1.35 लाख हेक्टेयर भूमि पर गेहूं की फसल की है। विशेषज्ञों की मानें तो बारिश के बाद गेहूूं की फसल की पैदावार बढ़ाने के लिए खाद की बहुत आवश्यकता है लेकिन जिले में यूरिया का स्टॉक खत्म हो चुका है। ऐसे में किसान खासे परेशान हैं। इधर, निजी दुकानदार मौके को भुनाने में जुटे हुए हैं। जिले और खास तौर पर ग्रामीण इलाकों के निजी खाद विक्रेता चोरी छिपे दूसरे जिले से खाद लाकर किसानों को ऊंचे दामों में बेच रहे हैं और किसान मजबूरी में खाद खरीदने को मजबूर हैं। बताया जा रहा है कि इस संबंध में किसानों ने कृषि विभाग के अधिकारियों को भी शिकायत की लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। दबंग दुकानदार खुलेआम ओवररेट पर खाद बेच रहे हैं।
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आंकड़ों पर नजर
1.35 लाख हेक्टेयर में है गेहूं की फसल
02 लाख किसानों ने गेहूं की बुवाई की है
2.65 लाख किसान जिले में है पंजीकृत
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वर्जन
1. खाद के दामों में कमी आने की खुशी हुई थी, लेकिन अब खाद न मिलना रोने के बराबर है। समय से खाद मुहैया नहीं हुआ तो किसान बर्बाद हो जाएगा।
प्रेमचंद्र, नगला कलुआ
2. खाद न मिलने के कारण मटर और गेहूं की पांच बीघा फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई है। कर्जा लेकर खेत को पट्टे पर लिया था।ऐसी स्थिति में लागत भी निकल पाना मुश्किल लग रहा है।
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कल्लू खां, मारहरा
3. जब से यूरिया खाद के दाम कम हुए है। तब से खाद ही नहीं मिल पा रही है। किसानों को भारी नुकसान हो रहा है। इस छति की भरपाई होना मुश्किल है।
भगवान सिंह, नोजरपुर
4. खाद न मिलने से खेतों में खड़ी गेहूं की फसल की बढ़त के साथ साथ पैदावारी पर भी असर पड़ेगा। इससे भूसा की भी समस्या पैदा हो सकती है
नेमसिंह, समोखर
5. बारिश के बाद फसल में खाद लगने से एक साथ पौधों की बढ़त हो जाती है। गेहूं का पौधा भी छोटा रहेगा और पैदावारी पर भी असर पड़ेगा।
दिनेश मिश्रा, कृषि विशेषज्ञ - कृषि विज्ञान केंद्र - अवागढ़
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