कासगंज/सोरों। विचित्र रहन सहन, विचित्र दुनिया, व्यवहार भी अजीब तरीके का। सर्दी हो या गर्मी या फिर बरसात का मौसम, कभी वस्त्र न पहनने वाले नागा साधुओं की दुनिया भी अजीब है। हवन कुंड की राख की धूनी ही उनका वस्त्र है और हाथ में त्रिशुल, सुलगती चिलम उनकी शान है। देशभर के तमाम नामचीन अखाड़ों के साधू सोरों में इसी पहचान के साथ पहुंच गए हैं और शाही स्नान की तैयारियों में जुट गए हैं।
सोरों के मेला मार्गशीर्ष में अरसे से नागा साधुओं के शाही स्नान की परंपरा चली आ रही है। इस बार 20 दिसंबर को शाही स्नान होगा और नागा साधू शोभायात्रा के रूप में स्याही निकालेंगे। स्याही इनकी विशेष पहचान होती है। यह स्याही इलाहाबाद, उज्जैन और सोरों में ही निकाली जाती है। इस स्याही को शाही सवारी भी बोलते हैं। सोरों के नागालैंड अखाड़े में इन साधुओं की धूनी रम गई है। धूनी में कई महंत संत की दीक्षा दे रहे हैं।
पुरोहितों ने की मेजबानी
कासगंज। सोरों के नागालैंड अखाड़ा में देशभर से पहुंचे नागा साधुओं की मेजबानी के लिए पुरोहित तैयार दिखे। यहां पुरोहितों द्वारा अखाड़े में हर तरह का सहयोग दिया जा रहा है। खान पान और रहन सहन की व्यवस्था भी मेजबान कर रहे हैं, लेकिन पालिका की बेरुखी से नागालैंड में सहयोग नहीं हो पा रहा। देशभर से पहुंचने वाले साधुओं ने पालिका की लापरवाही पर क्रोध दिखाया।
इन अखाड़ों से आए साधु
सोरों। पंच दशनाम आवाहन अखाड़ा, सरकार गणपति अखाड़ा बनारस, जूना अखाड़ा, निर्जंनी अखाड़ा हरिद्वार, अटल अखाड़ा, आनंद अखाड़ा, अग्नि अखाड़ा, पंचायती बड़ा उदासीन अखाड़ा, खड़ग दर्शन संप्रदाय, वैष्णव चतुर्थ संप्रदाय सहित विभिन्न अखाड़ों के नागा साधू सोरों पहुंच गए हैं। ब्रह्मलीन नागासाधू महंत सेवागिरी द्वारा देशभर के नागा साधुओं के साथ शाम को हर रोज मंथन हो रहा है।
साधुओं की बात-
- नागालैंड अखाड़े में पालिका की ओर से इंतजाम अच्छे नहीं हैं। पालिका नागा साधुओं को लेकर गंभीर नहीं है। यह अच्छी बात नहीं। साधु संतों की सेवा में पालिका को आगे आना चाहिए। शांति गिरी, राजस्थान ।
- नागा साधू हर साल यहां आते हैं। पिछली सालों तक देखने को मिला कि नागालैंड में रोशनी की अच्छी व्यवस्था होती थी, लेकिन इस साल व्यवस्था बेहतर दिखाई नहीं दे रही- सेवाराम गिरी, दिल्ली।