एटा। मीजल्स रूबेला की वैक्सीन बड़ी संख्या में खराब हो चुकी है। हालांकि स्वास्थ्य अधिकारी वैक्सीन खराब होने को लेकर गंभीर नहीं हैं। वैक्सीन खराब होने की बात आम कहकर जिम्मेदारी से हाथ खड़े कर रहे हैं।
मीजल्स रूबेला टीकाकरण अभियान में अब तक 33 फीसदी लक्ष्य को पूरा किया जा चुका है। जिले में नौ माह से लेकर 15 वर्ष तक के छह लाख 78 हजार 433 बच्चों को टीकाकरण होना है। इनमें से अब तक दो लाख 25 हजार 133 बच्चों का टीकाकरण हो चुका है। एमआर वैक्सीन लगाने के लिए दो लाख 38 हजार 590 बच्चों के लिए जारी की गई थी लेकिन जिम्मेदारों की उदासीनता के चलते 13 हजार 457 बच्चों की वैक्सीन खराब हो गई है। इसको लेकर जिम्मेदार गंभीर नहीं हैं।
आठ डिग्री तापमान के बाद खराब हो जाती है वैक्सीन
वैक्सीन को एक निर्धारित तापमान में रखा जाता है। चिकित्सकों का कहना है कि शून्य से आठ डिग्री तापमान तक वैक्सीन ठीक रहती है लेकिन इसके बाद तापमान बढ़ने पर वैक्सीन खराब हो जाती है। बार-बार आइस बॉक्स के खुलने की वजह से तापमान आठ डिग्री से अधिक होने पर वैक्सीन खराब हो रही है।
अल्पसंख्यक बच्चों ने नहीं कराया टीकाकरण
मदरसों में बच्चों का टीकाकरण नहीं कराया गया। इस पर टीकाकरण टीम ने एसडीएम को सूचना देकर बुलाया। मौके पर पहुंचे एसडीएम ने समझाया लेकिन उनकी मौजूदगी में ही टीकाकरण कराया गया लेकिन बाद में बंद करा दिया गया। हालांकि एसडीएम ने भी अल्पसंख्यक संस्थाओं को चलाने वाले लोगों से सामाजिक कार्य में सहयोग करने के लिए कहा था।
जिले में 6.78 लाख से अधिक बच्चों का टीकाकरण होना है। इसमें से 2.25 लाख बच्चों को वैक्सीन लगाई जा चुकी है। अभियान के तहत 13 हजार वैक्सीन खराब भी हुई है। जनहित में सभी को आगे आकर बच्चों का टीकाकरण कराना होगा।
डा. रामसिंह, नोडल अधिकारी एवं एसीएमओ
आंकड़ों पर नजर
13 हजार से अधिक वैक्सीन हो गई खराब
6.78 लाख बच्चों का होना है टीकाकरण
8 डिग्री सेंटीग्रेट के बाद तापमान बढ़ने पर खराब हो जाती है वैक्सीन
2.25 बच्चों को हो पाया है अभी तक टीकाकरण