मैनपुरी। शौचालय निर्माण में होने वाले घोटाले सामने आने के बाद अब जिला पंचायतराज विभाग सतर्क हो गया है। अब वर्ष 2013 के बाद बने सभी शौचालयों की दोबारा से जांच की जाएगी। जिले को खुले में शौच से मुक्त करने के लिए प्रशासन अपनी पूरी ताकत झोंक रहा है। इसके बाद भी लगातार शौचालयों में नए-नए घोटाले सामने आ रहे हैं। हाल ही में कुरावली के गांव फतेहजंगपुर में जहां शौचालय की धनराशि का गबन करने पर ग्राम प्रधान को जेल भेजा गया है, तो वहीं बरनाहल के गांव भिड़ौरा में भी एक पुराना मामला सामने आया है।
इसमें भी पंचायत सचिव के खिलाफ एफआईआर कराई गई है। इन सब घोटालों को देखते हुए विभाग ने 2013 से लेकर अब तक बने सभी शौचालयों का सत्यापन कराने की तैयारी की है। इसके तहत ग्राम पंचायतों में शौचालय निर्माण के लिए भेजी गई धनराशि व निर्माण किए गए शौचालयों का मिलान किया जाएगा। इससे एक साथ ही पता चल जाएगा कि कहां-कहां शौचालय की धनराशि का गबन किया गया है। वहीं जांच की सूचना से ग्राम प्रधानों व पंचायत सचिवों में हड़कंप मच गया है। उन्हें डर है कि कहीं उनका कारनामा भी खुलकर जांच में सामने न आ जाए।
1.74 लाख शौचालयों का हुआ निर्माण
जिले को खुले में शौच से मुक्त करने के लिए बेसलाइन सर्वे के आधार पर 1.74 लाख शौचालय बनवाए गए थे। कई बार शौचालयों का निर्माण पूरा होने के लिए समय निर्धारित किया गया, लेकिन अब तक शौचालयों का निर्माण पूरा नहीं हो सका है। शौचालयों के सत्यापन में कहीं आधे अधूरे शौचालय मिल रहे हैं तो कहीं शौचालय बनाए ही नहीं गए हैं। ऐसे में जिले को ओडीएफ करना आसान नहीं होगा।
कैसे होगा 60 हजार शौचालयों का निर्माण
पांच साल से शौचालयों का निर्माण कराया जा रहा है, लेकिन अब तक 1.74 लाख शौचालयों का निर्माण पूरा नहीं हो सका है। इसमें से अब तक सैकड़ों शौचालय तो धरातल पर बने ही नहीं हैं। अब एक बार फिर सर्वे के बाद 60 हजार लोगों के घरों में शौचालय बनवाए जाने हैं। इसके लिए जनवरी तक का समय दिया गया है। आखिर दो महीने में ये कैसे संभव हो पाएगा।
शौचालयों का सत्यापन कराया जाएगा। इससे साफ हो जाएगा कि वास्तव में कितने शौचालयों का निर्माण नहीं कराया गया है। जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।
यतेंद्र सिंह, डीपीआरओ, मैनपुरी।