फिरोजाबाद। केंद्र और प्रदेश सरकार का पूरा जोर जहां शहरों को स्वच्छ बनाने पर है, वहीं नगर निगम प्रशासन सरकार की मंशा को पलीता लगा रहा है। स्वच्छ सर्वेक्षण में एक बार फिर शहर को नंबर एक बनाने के नाम पूरे बड़े-बड़े होर्डिंग बैनर लगा दिए हैं, लेकिन शहर के प्रमुख चौराहों, गली-मोहल्लों में गंदगी के ढेर लगे हैं। इस ओर कतई गंभीरता नहीं दिखाई जा रही।
करीब आठ लाख की आबादी के लिए सफाई व्यवस्था उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी नगर निगम पर है। शहरों को स्वच्छ बनाने के लिए केंद्र व प्रदेश सरकार द्वारा हर साल करोड़ों का बजट दिया जाता है, परंतु शहर की सफाई व्यवस्था में जरा भी सुधार नहीं हो पा रहा। क्योंकि नगर निगम प्रशासन का पूरा जोर मात्र होर्डिंग बैनरों के सहारे शहर को स्वच्छ बनाने पर रहता है, जबकि धरातल पर कोई ठोस योजना नहीं बनाई जाती।
नगर निगम में हजारों कर्मचारी तैनात हैं। सुबह से देर रात तक सैकड़ों वाहन दौड़ते हैं। हजारों लीटर डीजल खर्च होता है, उसके बाद भी गली-मोहल्ले तो दूर शहर के प्रमुख चौराहों, बाजारों, भीड़ भरे स्थानों पर गंदगी के ढेर नजर आते हैं। चौराहों पर लगे हरे-नीले डस्टबिन टूटे पड़े हैं अथवा कूड़े से भरे पड़े हैं। दोपहर तक सड़कों से कूड़े के ढेर नहीं उठते। सफाई वाहन बाजार में फंसने के कारण आए दिन जाम के हालात पैदा होते हैं, परंतु नगर निगम अपनी कार्य प्रणाली में कोई सुधार होता नहीं दिख रहा।
नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना का सोमवार को तीसरी बार आगमन हो रहा है। वह विशेष स्वच्छता रैली में प्रतिभाग करने के साथ जनता को स्वच्छता का संदेश देंगे। नगर निगम प्रशासन ने भले ही नगर विकास मंत्री के आगमन को लेकर लगभग तैयारियां पूरी कर ली हैं, परंतु बोर्ड के पार्षद ही भ्रष्टाचार, ठप विकास कार्य व अफसरों की मनमानी को लेकर नगर निगम प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलने को तैयार हैं।
शहर को स्वच्छ बनाने के लिए सबसे जरूरी सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट का प्रस्ताव पिछले दस सालों से फाइलों में ही अटकी है। वर्ष 2008 में नगर पालिका (वर्तमान में नगर निगम) द्वारा कोटला रोड पर कुतकपुर चनौरा में जमीन का अधिग्रहण किया, परंतु दस सालों में आजतक सॉलिड वेस्ट मैनजमेंट की योजना धरातल पर नहीं उतर सकी।