कासगंज। जमीन पर कब्जे को लेकर कटरी फिर दहलने को तैयार है। मेहोला और इंदा जसनपुर के ग्रामीणों में हदों को लेकर पाले खिंच गए हैं। बुधवार को कब्जे को लेकर दोनों पक्षों में फायरिंग भी हो गई। सूचना पर पुलिस के पहुंचने पर ग्रामीण तितर बितर हो गए।
खादर की जमीन सदैव विवादित रही है। गंगा नदी की भूमि पर कब्जे को लेकर दो साल पहले कटरी गोलियों से गूंजी थी। थाना सुन्नगढ़ी क्षेत्र के गांव किसौल, किलौनी के ग्रामीणों के बीच फायरिंग में पांच लोगों की मौत हो गई थी। पुलिस प्रशासन ने भले ही नदी की जमीन का सीमांकन कर कब्जे हटवाए हों, लेकिन कटरी में अभी भी अवैध कब्जे है।
थाना सिकंदरपुर वैश्य क्षेत्र के गांव मेहोला और इंदाजसनपुर में भी किलौनी किसौल जैसे हालात हैं। यहां नदी की जमीन पर कब्जे को लेकर दो गांव के ग्रामीणों में पाले खिंचे हैं। आए दिन विवाद होते हैं। बुधवार को दोनों पक्षों में फायरिंग हो गई। सूचना पर यूपी 100 और थाना पुलिस मौके पर पहुंची। हूटरों की गूंज सुन विवाद कर रहे ग्रामीण भाग गए। पुलिस ने पीछा भी किया, लेकिन कोई ग्रामीण पकड़ा नहीं गया। पुलिस का मानना है कि जिस जमीन को लेकर विवाद है। कटरी की जमीन पर मेहोला और इंदाजसन का कोई ग्रामीण कब्जा नहीं कर सकता।
लकीरें दे रहीं संघर्ष के संकेत
कासगंज। मेहोला और इंदाजसनपुर में संघर्ष की शुरूआत हो गई है। हालांकि कटरी क्षेत्र के अन्य इलाकों में भी बाढ़ से मिटी लकीरें विवाद के संकेत दे रहीं हैं। थाना सिकंदरपुर वैश्य क्षेत्र के गांव कादरगंज पुख्ता एवं कादरगंज खाम में भी यही हालात हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन के समक्ष अपनी समस्या भी रखी है। हालांकि अभी तक सीमाकंन शुरू नहीं हुआ है।
- इंदाजसनपुर एवं मेहोला के ग्रामीणों में कब्जे को लेकर विवाद की स्थिति है। फायरिंग की सूचना पर मौके पर पहुंचे, लेकिन पुलिस देखते ही ग्रामीण भाग गए। पहलवान सिंह, थाना प्रभारी सिकंदरपुर वैश्य
- बाढ़ के पानी से खेतों की मेड़े जरूर टूटी हैं। ग्रामीणों के समस्या बताने पर टीमें भेजी जाएंगी। राजस्व टीमों का गठन सीमांकन के लिए किया जा रहा है।
धीरेंद्र सिंह, एसडीएम, पटियाली