कासगंज। जनपद में मलेरिया के बाद अब डेंगू ने दस्तक दे दी है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के पास जांच व इलाज के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। मजबूरन मरीजों को उनके परिजन आगरा, अलीगढ़ आदि शहरों में ले जा रहे हैं।
जिले में एक माह से बुखार का प्रकोप बना हुआ है। अब तक एक दर्जन से अधिक लोग बुखार के चलते जान गंवा चुके हैं। इस बीच अब डेंगू के मामले भी सामने आने लगे हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के पास डेंगू की सिर्फ प्रारंभिक जांच के ही इंतजाम हैं। जांच की पुष्टि के लिए विभाग के पास कोई इंतजाम नहीं हैं। यदि प्रारंभिक जांच पॉजेटिव आती है, तो डेंगू की पुष्टि के लिए आगरा, अलीगढ़ के मेडिकल कॉलेज की लैब का सहारा लेना पड़ता है।
सोरों निवासी पंकज पारासरी के पुत्र प्रखर (12) को बुखार आया था। डेंगू की आशंका पर एनएस-1 जांच कराई, जो पॉजेटिव निकली। इसके बाद परिजन उसे बरेली के अस्पताल में ले गए। जहां डेंगू की पुष्टि हो गई। चार दिन से बालक का इलाज बरेली में चल रहा है। कुंवर पाल निवासी तवालपुर को कई दिन से बुखार आ रहा था। उनकी प्लेटलेेट्स लगातर गिर रही थी और रक्तस्राव भी हुआ।
चिकित्सक के पास ले जाया गया तो उसे भर्ती कर लिया। जनपद में वायरल फीवर व मलेरिया का प्रकोप भी थमा नहीं है। स्वास्थ्य केंद्रों पर अब तक इलाज को पहुंचे बुखार पीड़ित मरीजों में 309 मलेरिया पॉजेटिव के मामले सामने आ चुके हैं। स्वास्थ्य केंद्रों पर मरीजों की कतारें कम नहीं हो रही हैं।
डेंगू के ये हैं लक्षण
तेज बुखार, जुकाम, खांसी का होना, बदन व पेट दर्द की शिकायत, पैरों व हाथों में खुजली, शरीर पर लाल रंग के चकत्ते निकलना, गंभीर स्थिति में शरीर में सूजन आना, प्लेटलेट्स लगातार कम होना, शरीर से रक्तस्राव होना।
ये हैं डेंगू की जांचें
डेेंगू की पुष्टि के लिए रक्त में डेंगू पीसीआर, डेंगू आइजीजी या आइजीएम जांच कराई जाती हैं। पीसीआर बुखार आने के पांच दिन बाद से पॉजिटिव हो सकता है। आइजीजी या आइजीएम सात दिनों बाद से पॉजिटिव हो सकता है। शुरू में रक्त में प्लेटलेट की कमी इस बीमारी की तरफ इशारा करती है। बुखार आने के सात दिनों बाद ही इसकी पुष्टि हो पाती है।
डेंगू की प्रारंभिक जांच के लिए विभाग ने सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर एनएस-1 किट उपलब्ध करा दी हैं। यदि प्रारंभिक जांच पॉजेटिव आती है, तो फिर आगरा या अलीगढ़ के मेडिकल कॉलेज मरीज को रेफर किया जाता है। अभी तक एक भी मरीज की डेंगू की प्रारंभिक जांच पॉजेटिव नहीं मिली है।
-डा. राजकुमार सारस्वत, जिला मलेरिया अधिकारी।