कोसीकलां (मथुरा)। इंटरसिटी एक्सप्रेस की चपेट में आए दो युवकों की मौत के बाद भी रेल प्रशासन नहीं जागा है। घटना के 24 घंटे बाद भी यात्री बेधड़क लाइन क्रास करते रहे। हादसे में घायल हुए पांचों युवकों का इलाज चल रहा है।
रेलवे विभाग द्वारा यात्रियों की सुविधा के लिए प्लेटफार्मों तक जाने के लिए ओवर ब्रिज बनाए गए हैं, लेकिन ओवर ब्रिज को छोड़कर यात्री रेल पटरियों को पार करते नजर आते हैं। उन्हें ना तो नियमों की परवाह है और ना ही अपनी जान की।
मंगलवार को स्टेशन पर हुए हादसे के बाद भी यात्रियों ने कोई सबक नहीं लिया। यात्रियों का कहना था कि प्लेटफार्म छोटा होने से इंटरसिटी एक्सप्रेस के सात डिब्बे प्लेटफार्म से आगे निकल जाते हैं, ऐसे में उन्हें लाइन के समीप खड़े होकर ट्रेन पकड़नी होती है।
रेलवे अधिकारियों की दलील है कि समय-समय पर लोगों को समझाया जाता है जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं तथा कई बार पटरियां पार करते समय लोगों को पकड़ा भी जाता है फिर भी यात्री नहीं मानते। जल्द ही जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।
कैबिनेट मंत्री ने जाना घायलों का हाल
कैबिनेट मंत्री चौधरी लक्ष्मीनारायण ने बुधवार को गांव नगरिया पहुंचकर ट्रेन हादसे में अपनी जान गंवाने वाले दो युवकों के परिजनों को सांत्वना दी। उन्होंने परिजनों को जल्द ही स्टेशन पर आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया, जिससे भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।
उन्होंने मृतक के परिजनों को मुख्यमंत्री सहायता कोष से मुआवजा दिलाए जाने का भरोसा दिलाया। इसके बाद अस्पताल पहुंचे, जहां उन्होंने घायलों का हाल जाना। जिला पंचायत सदस्य नरदेव चौधरी, मनोज फौजदार, राजवीर सिंह आदि थे।
रेलवे की सहायता राशि नाकाफी
ट्रेन हादसे में मृतक दोनों युवकों के घरवालों को रेलवे ने जो सहायता राशि दी है, वह ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। दैनिक यात्रियों का कहना था कि मृतक के परिजनों की आर्थिक हालत ज्यादा अच्छी नहीं है।
इतनी कम राशि से मृतक के परिजन कैसे अपना जीवन ज्ञापन कर सकेंगे। इससे तो अच्छा है कि रेलवे दोनों मृतक के परिजनों को नौकरी दे दे।