मथुरा। सीआरपीएफ की 16 बटालियन ने सोमवार को शौर्य दिवस मनाया। बटालियन मुख्यालय पर हुए कार्यक्रम में सैनिकों के अदम्य साहस, वीरता और गौरवमयी इतिहास के बारे में बताया।
सोमवार को रॉची बांगर स्थित बटालियन मुख्यालय पर कमांडेंट ब्रजेश प्रताप सिंह ने सलामी ली। इस दौरान कमांडेंट ब्रजेश प्रताप सिंह ने सीआरपीएफ के गौरवमयी इतिहास पर प्रकाश डाला। बताया कि नौ अप्रैल 1965 को बटालियन की एक कंपनी पाक सीमा पर गश्त कर रही थी। इसी दौरान पाक सेना की 51 इनफेंट्री के जवानों ने बटालियन और सरदार पोस्ट पर कब्जा करने की नीयत से हमला कर दिया।
इस पर बटालियन के जवानों ने मुकाबला किया और पाकिस्तान के 34 सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया। सीआरपीएफ ने पूरे 12 घंटे तक अपने दम पर पाकिस्तान के सैनिकों को रोके रखा। इसके बाद भारतीय सेना ने मोर्चा संभाल लिया। इसमें बटालियन के चार जवान शहीद हो गए थे।
इस पर तत्कालीन गृह मंत्री गुलजारी लाल नंदा ने सीआरपीएफ के जवानों की हौसलाफजाई की थी। इस दौरान द्वितीय कमान अधिकारी नरेश पंवार, केडी शर्मा, उमेश यादव, सहायक कमांडेंट अमित कुमार सिंह, सरोत गुप्ता, बबिता शर्मा, सुधीर सिंह, नाहर सिंह जादौन आदि मौजूद रहे।