निजामपुर में बारात चढ़ाए जाने के प्रकरण के मामले का अभी तक कोई हल नहीं निकल पाया है। प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों ने शनिवार को गांव में जाकर ग्रामीणों के बीच इस प्रकरण को लेकर फिर से वार्ता की, लेकिन कोई सार्थक हल नहीं निकल पाया। दलित परिवार गांव में बारात चढ़ाने की बात करता नजर आया तो वहीं गांव के अन्य लोग परंपरा के निर्वहन की बात कर रहे। अधिकारियों ने इस मामले की रिपोर्ट जिलाधिकारी को दे दी है। डीएम ग्रामीणों को बुलाकर फिर से वार्ता करेंगे।
निजामपुर में दलित युवक की बारात का प्रकरण सुर्खियों में है। हालांकि दलित परिवार लड़की की उम्र कम होने के कारण शादी रोकने का निर्णय तो ले चुका है, लेकिन अभी शादी की नई तिथि पर निर्णय नहीं किया गया है। युवक संजय की ओर से लगातार बारात चढ़ाने की मांग को लेकर नेताओं और प्रशासनिक अफसरों को शिकायत कर फरियाद कर रहा है, लेकिन कोई निदान नहीं मिल पा रहा है।
शनिवार को तहसीलदार एनराम, इंस्पेक्टर अशोक कुमार सिंह गांव में पहुंचे। उन्होंने दलित परिवार व अन्य परिवार के लोगों को पंचायत के लिए बुलाया। लोग पंचायत में पहुंचे। दोनों ओर से कई ग्रामीणों ने अपने अपने पक्ष रखे, लेकिन कोई सार्थक हल नहीं निकल पाया। युवती के भाई बीटू ने कहा कि उनका परिवार पूरे गांव में बारात चढ़ाना चाहता है। आखिर उसे यह अनुमति क्यों नहीं मिल रही।
उसने खेत में पानी न मिलने की भी शिकायत की। वहीं दूसरे पक्ष के लोगों ने कहा कि गांव में बारात चढ़ाने पर किसी को आपत्ति नहीं है, लेकिन बारात चढ़ाने को लेकर राजनीति की जा रही है। अनावश्यक रूप से इस मामले को तूल दिया जा रहा है। यदि दलित परिवार के लोग गांव में ही बात करते तो किसी को आपत्ति नहीं होती। कुछ लोगों ने कहा कि गांव में जो पहले से परंपरा चल रहीं हैं उनका पालन होना चाहिए। गांव के पप्पन चौहान, चेतन चौहान ने भी पक्ष रखते हुए राजनीतिकरण को गलत बताया। गांव में जाकर प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों ने भौगोलिक स्थिति का आकलन किया और नक्शे तैयार किए।
तहसीलदार एनराम ने बताया कि ग्रामीणों को काफी समझाने की कोशिश की गई, लेकिन अभी कोई अंतिम सहमति किसी बात को नहीं हो पाई है। जिलाधिकारी को वार्ता की रिपोर्ट प्रेषित की गई है। अब जिलाधिकारी ग्रामीणों से बात करके समाधान निकालने की पहल करेंगे।