मथुरा। नगर निगम की पहली बोर्ड बैठक में शनिवार को हंगामे के बीच 12 सदस्यों वाली कैबिनेट चुन ली गई। इस दौरान कैबिनेट में स्थान न मिलने पर सपाइयों ने हंगामा किया। कैबिनेट में भाजपा के नौ, कांग्रेस के दो और बसपा के एक पार्षद को शामिल किया गया है।
कैबिनेट गठन की शुरूआत में ही महापौर मुकेश आर्यबंधु ने सदन में सहमति के आधार पर कैबिनेट गठन का निर्णय लिया था। नगर आयुक्त उज्जवल कुमार ने इसके लिए सभी को 20 मिनट का समय दिया और कहा कि सभी 20 मिनट में अपने दल के नाम प्रेषित कर दें। इस दौरान कांग्रेस और बसपा ने नाम दे दिए। दोनों दलों के नाम आते ही महापौर ने कैबिनेट की घोषण कर दी। उन्होंने 9 नाम भाजपा, दो कांग्रेस और एक बसपा पार्षद का लिया। कैबिनेट की घोषणा होते ही सपाई महापौर के पास पहुंच गए और अपना नाम देने लगे। महापौर ने समय सीमा खत्म होने का हवाला देते हुए कैबिनेट में नाम शामिल करने से इंकार कर दिया। इसे लेकर सपाइयों ने जमकर हंगामा काटा और धरने तक की धमकी दे डाली। करीब 15 मिनट तक सदन में हंगामा होता रहा। इसके बाद महापौर सदन से चले गए।
सपा के पार्षद आकाश ने बताया कि तीन सपा के पार्षद हैं और तीन निर्दलीय का समर्थन उन्होंने हासिल किया है। उन्होंने महापौर पर भेदभाव का आरोप लगाया। उधर, महापौर ने कहा कि समय सीमा के बाद सपाइयों के आने के कारण वह कैबिनेट में शामिल नहीं सके। सदन की पहली बोर्ड बैठक एक घंटे में खत्म हो गई। 12 बजे शुरू हुई और एक बजे खत्म हो गई। निगम की पहली बैठक में गोवर्धन विधायक कारिंदा सिंह,बलदेव विधायक पूरन प्रकाश के अलावा अपर नगर आयुक्त सुशीला अग्रवाल, कर निर्धारण अधिकारी भरत लाल और कर अधीक्षक आशुतोष गुप्ता मौजूद थे।
चुनाव से बची भाजपा
मथुरा। 70 में से 41 पार्षद होने के बाद भी भाजपा चुनाव से बचती रही, जबकि विपक्ष भाजपा के चुनावी दांव से परेशान था। वहीं, भाजपा ने विपक्षियों को सौगात देते हुए उनके पार्षदों को भी कैबिनेट में स्थान दे दिया। उधर, कैबिनेट से पहले माना जा रहा था कि भाजपा चुनाव की बदौलत कैबिनेट मेें अपने सभी ही पार्षदों को ही स्थान देगी।
पहली कैबिनेट में शामिल हुए ये 12 पार्षद
मथुरा। भाजपा के पार्षद वैभव अग्रवाल, मेघश्याम सैनी, रूप सिंह पटेल, हेमंत अग्रवाल, मीरा अग्रवाल, विष्णु सिंह, राजेश सिंह पिंटू, रामदास चतुर्वेदी, अनीता गुर्जर, कांग्रेस के ध्रुव नारायण शर्मा, तिलकवीर और बसपा की पार्षद अंजलि कर्दम।