एटा। व्हाट्स एप ग्रुप के जरिए रोडवेज को करोड़ों का चूना लगाने वाले परिचालकों को बचाने में निगम के अधिकारी ही लगे हुए हैं। परिवहन निगम के क्षेत्रीय प्रबंधक ने जांच रिपोर्ट बना दी। उन्हाेंने एमडी को भेजी जांच में सुबूत नहीं होने का हवाला दिया। जबकि मामले में एआरएम को पूरे साक्ष्य उपलब्ध कराए हैं।
दरअसल, अमर उजाला ने पिछले महीने रोडवेज परिचालकों के एक व्हाट्स एप ग्रुप का खुलासा किया था। इस ग्रुप से जुड़े परिचालक विभिन्न मार्गों पर चेकिंग टीम होने की सूचना एक-दूसरे से साझा करते थे। इसके जरिए रोडवेज परिचालक सवारियों को बिना टिकट यात्रा कराते थे।
मामले की शिकायत मुख्यमंत्री कार्यालय से की गई। जिस पर अपर मुख्य सचिव ने परिवहन निगम के प्रबंध निदेशक को जांच सौंपी। परिवहन निदेशक ने मामले की जांच क्षेत्रीय प्रबंधक को दी। क्षेत्रीय प्रबंधक अलीगढ़ ने कार्यालय में बैठकर ही जांच रिपोर्ट तैयार कर दी है।
जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि मामले में साक्ष्य नहीं मिलने से कोई कार्रवाई नहीं हो सकती। उन्होंने जांच रिपोर्ट में हवाला दिया है कि एआरएम स्तर पर गोपनीय जांच चल रही है, लेकिन इसमें भी कोरम पूरा करने की तैयारी हो रही है।
व्हाट्सएप ग्रुप के संबंध में एआरएम एटा को व्हाट्स ग्रुप के सभी स्क्रीनशॉट और परिचालकों के नंबर उपलब्ध कराए गए थे। आरएम ने जांच में न तो ग्रुप से जुड़े परिचालकों के बयान दर्ज किए और न ही जिन चेकिंग टीमों की जानकारी साझा की गई, उनकी स्थिति के बारे में जानकारी जुटाई।
ऐसे में साफ है कि निगम के अधिकारी भी करोड़ों के खेल को शह दे रहे हैं। मामले में आरएम अलीगढ़ ने प्रबंध निदेशक को जांच रिपोर्ट भेजकर पल्ला झाड़ लिया। शिकायतकर्ता सुनील कुमार ने बताया कि आरएम ने जांच में औपचारिकता निभाई है।
परिवहन निगम के परिचालकों के ग्रुप को लेकर पहले भी शिकायतें होती रही हैं। हर बार निगम के अधिकारियों ने परिचालकों को बचाते हुए करोड़ों की राजस्व को चोरी को बढ़ावा दिया है।