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मंदिरों के दर्शन किए बगैर ही लौटे 45 हजार से ज्यादा भक्त

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बंद मंदिर के कपाट। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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गोवर्धन (मथुरा)। दानघाटी मंदिर के सामने आरती स्थल को तोड़े जाने का विरोध दूर-दराज से आने वाले भक्तों को भी बेचैन करने लगा है। आमतौर पर परिक्रमा की शुरुआत दानघाटी मंदिर में माथा टेककर ही की जाती है। लेकिन पिछले दो दिनों से मंदिर के कपाट ही बंद हैं। 45 हजार से भी ज्यादा गिरिराज जी के भक्त मंदिर के दर्शन किए बगैर की लौट गए हैं।
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सामान्य दिनों में भी हर रोज पंद्रह से बीस हजार लोग गोवर्धन की परिक्रमा लगाते हैं। सर्दियों में परिक्रमार्थियों की संख्या दिन में बढ़ जाती है। उत्तर प्रदेश के साथ ही दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और मध्यप्रदेश तक से लोग पहुंचते हैं। क्योंकि दो दिनों से मंदिरों के कपाट बंद हैं लिहाजा परिक्रमार्थी भी परेशान हैं। लोगों का कहना है कि इस विवाद का निपटारा प्रशासन को जल्दी करना चाहिए। क्योंकि इस झगड़े में वह लोग अपने भगवान का भी दीदार नहीं कर पा रहे हैं।

दिल्ली से पहुंचे रोशन कुमार ने बताया कि यह पहली बार हुआ है जब परिक्रमा शुरू करने से पहले दानघाटी मंदिर के दर्शन नहीं कर पाए। कपिल गुप्ता का कहना था कि वह पिछले दो साल से परिक्रमा लगा रहा है। पहले दानघाटी मंदिर पर माथा टेकता हूं और फिर गिरिराज जी की परिक्रमा शुरू करता हूं। लेकिन इस बार तो मंदिर के कपाट ही बंद हैं।
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मथुरा से परिक्रमा लगाने पहुंचे भूदेश माहेश्वरी का कहना था कि प्रशासन को चाहिए कि वह भक्तों की भावना को ध्यान रखते हुए इस विवाद को निपटाए। भगवान को भक्तों से दूर नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सेवायतों ने भी मंदिरों के कपाट बंद कर रखे हैं।

मेरठ से आए जतिन गुप्ता ने बताया कि इतने समय तक तो कभी मंदिर के कपाट बंद नहीं रहे हैं। इतिहास में यह पहली दफा है। लेकिन प्रशासन फिर भी चुप्पी साधे है। सेवायतों को बैठाकर बात की जाए। उनकी बात सुनी जानी चाहिए।
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