रामलीला में रावण वध की लीला का मंचन किया गया। राम ने बुराई के प्रतीक रावण का वध किया। अग्निवाण से रावण के पुतला के फूंकते ही भगवान राम के भक्त जयकारे लगाने लगे। दशहरा के मौके पर रामभक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा।
युद्ध में मेघनाथ व कुंभकरण के मारे जाने के बाद रावण स्वयं युद्ध के मैदान में आ गया। राम और रावण के बीच युद्ध शुरू हुआ। रावण रथ पर युद्ध कर रहा था और राम बिना रथ के थे। तभी भगवान इंद्र ने अपना रथ राम के लिए भेजा। राम ने उस पर सवार होकर लंकेश से युद्ध किया। जब रावण के शीश कटने के बाद फिर से नया शीश निकलने लगे तो राम चिंता में डूब गए। उन्होंने विभीषण से रावण को मारने का राज पूछा। विभीषण ने बताया कि लंकेश की नाभि पर प्रहार किया जाए। राम ने नाभि में बाण मारकर रावण का अमृत सूखा दिया जिससे उसका अंत हो गया। रावण के विशालकाय पुतले में राम ने अग्निवाण छोड़कर आग लगाई ।पुतले में लगी आतिशबाजी का दर्शकों ने भरपूर लुत्फ लिया।
पुतले की अस्थियां ले जाने की रही होड़
कासगंज। रावण का पुतला दहन होने के बाद लोगों में उसकी अस्थियां अपने घरों पर ले जाने की होड़ रही। लोग पुतले के जलने के बाद उसमें लगी बांस की खपंच को लूटने में लग गए। रामलीला कमेटी के पदाधिकारी, पुलिस कर्मी लोगों को रोकने का प्रयास भी करते रहे।
गली कूंचों में भी जले रावण के पुतले
कासगंज। रावण का पुतला जलाने के लिए बच्चों के बीच काफी क्रेज देखा गया। गली कूंचों में बच्चों ने कागज, गत्ते के छोटे छोटे पुतले बनाए। इन पुतलों में भी पटाखे लगाए गए। देर सायं बच्चों के द्वारा इन पुतलों का दहन किया गया। धमाके की आवाज होने के साथ ही बच्चे खुशी से तालियां बजाने लगे।