भगवान दास जो अज्ञात शवों का अंतिम संस्कार करते हैं
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वृंदावन (मथुरा)। जिसका कोई नहीं है उसका भगवानदास है। भगवानदास एक ऐसे शख्स हैं जो पिछले आठ साल से उन शवों का अंतिम संस्कार कर रहे हैं जिन्हें कोई अपनाने वाला नहीं। वह अब तक 1000 को मुखाग्नि दे चुके हैं। कोई सरकारी मदद नहीं मिलती बल्कि वह अपने खर्च पर वृंदावन में मिलने वाले शवों का विधि-विधान से अंतिम संस्कार करते हैं।
भगवानदास का कहना है कि 2010 जनवरी माह में अज्ञात शवों की दुर्गति रोकने के लिए उन्होंने यह बीड़ा उठाया था। वह अपने परिवार के साथ मथुरा जा रहे थे तभी रास्ते में एक वृद्ध के शव को झाड़ियों के पास जानवर नोंच रहे थे। यह देख उनका कलेजा कांप उठा और उन्होंने शव का विधि-विधान से यमुना किनारे ले जाकर अंतिम संस्कार किया।
शुरुआत में उन्होंने अकेले इस काम को शुरू किया लेकिन बाद में उनके साथ ओम प्रकाश पचौरी, श्रीचंद्र, डॉ. जय प्रकाश, प्रदीप अग्रवाल, केदार भगत, रविकांत गौतम आदि लोग भी जुड़े। वर्ष 2015 में गोलोक सेवा समिति संस्था बनी, जिसके तहत लावारिस शवों के साथ गो माता के शव का अंतिम संस्कार किया जा रहा है।
अमावस्या पर करते हैं ब्रह्मभोज
गोलोक सेवा समिति हर माह की अमावस्या पर मृतकों की आत्मा की शांति के लिए ब्रह्मभोज कराती है। वहीं पितृपक्ष में वह मृतकों की आत्मा की शांति के लिए यमुना के केशीघाट पर सामूहिक तर्पण भी करते हैं।
कपड़ों को रखते है संभालकर
लावारिस शवों का अंतिम संस्कार कराने के साथ वह अज्ञात लोगों के कपड़े और निशानी के साथ फोटो संभालते चले आए हैं। प्रत्येक शव के अंतिम संस्कार की तिथि भी रजिस्टर में दर्ज की जाती है। अज्ञात शवों के मिलने पर पुलिस भी उनकी संस्था की मदद लेती है।