मैनपुरी-आलीपुर खेड़ा। कस्बा स्थित माता गमा देवी के मंदिर पर वर्ष भर पूजा पाठ कार्यक्रम चलते हैं। माता कस्बा के लोगों की अकाल आदि के समय मदद करती हैं। नव दंपती को घर में प्रवेश से पहले माता के मंदिर में माथा टेकना होता है। कस्बा के लोगों के लिए माता का मंदिर सबसे बड़ी आस्था का प्रतीक है। कस्बा आलीपुर खेड़ा महादेव मंदिर श्री सुदर वाटिका के पास माता गमा देवी का मंदिर प्राचीन है। इसका निर्माण कब हुआ यह किसी को नहीं मालूम।
बस यही मालूम है कि किसी राजा ने यहां कुआं की खोदाई करवाई थी तभी मातारानी की मूर्ति निकली थी। तभी इस मंदिर की नींव रखी गई थी। यहां की एक परंपरा है कि नगर में नव दंपती को शादी के बाद सबसे पहले माता के मंदिर में माथा टेकना होता है, उसके बाद ही घर में प्रवेश कराया जाता है। वर्षा न होने पर मंदिर पर हवन किया जाता है। अकाल आदि के समय भी मातारानी की लोग पूजा अर्चना करते हैं जिससे उन्हें मदद मिलती है। इस मंदिर का जीर्णोद्धार वर्ष 1965 में गिधारी लाल उर्फ गिरधर स्वर्णकार ने करवाया था। नव रात्र में यहां विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है।
नवरात्र मां भवानी के विभिन्न स्वरूपों की याद दिलाते हैं। नवरात्र में हम सभी को माता की पूजा अर्चना करनी चाहिए। माता कई प्रकार से हमारी मदद करती हैं।
विवेक गुप्ता
मां का दर्जा देवों से भी बड़ा बताया गया है। इतिहास गवाह है जब-जब श्रृष्टि पर संकट आया है मां भवानी ने आगे आकर देवों की मदद की है। हम सभी को माता की पूजा अर्चना करनी चाहिए
सौरभ कुमार
नवरात्र में माता के नौ स्वरूप विशेष शक्ति प्रदान करने का कार्य करते हैं। सच्चे मन से नवरात्र के व्रत रखने से माता व्रतधारी की सारी मनोकामनाओं को पूरा करती हैं
नेहा देवी
नवरात्र पूजा अर्चना का विशेष पर्व है। इस पर्व पर सभी को माता की पूजा अर्चना करनी चाहिए। मां भवानी सभी प्रकार के कष्टों से निजात दिलाने वाली हैं।
नीलू दीक्षित