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छह करोड़ खर्च लेकिन जनसुविधाएं सिफर

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कासगंज। रोडवेज का नया बस स्टैंड बन गया है, इस पर छह करोड़ रुपये खर्च भी हो चुके हैं, लेकिन फिर भी मुसाफिरों को सहूलियतें नहीं मिली हैं। बैठने तक की सुविधा नहीं है। और तो और उन्हें पेयजल भी मयस्सर नहीं है।

सर्कूलर रोड पर पुराने बस स्टैंड परिसर में बनी इमारत तोड़कर छह करोड़ रुपये की लागत से नया भवन तैयार किया गया। निर्माण पूर्ण होने से पहले ही इसका उद्घाटन तत्कालीन परिवहन राज्यमंत्री मानपाल सिंह ने कर दिया था। कार्यदायी संस्था ने निर्माण तो कराया, लेकिन तमाम खामियां छोड़ दीं। यात्रियों को पहले की तरह अब भी खुले में बसों का इंतजार करना पड़ता है।
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टीन शैड तक की व्यवस्था नहीं की है। शीतल पेयजल के लिए रेफ्रिजरेटर तो है, लेकिन खराब पड़ा है। इसमें पानी की सप्लाई का भी इंतजाम नहीं है। टोंटी तक टूटी पड़ी हैं। मजबूरन यात्रियों को बोतलबंद पानी खरीदकर प्यास बुझानी पड़ती है। नए निर्माण में बाउंड्रीवाल भी नहीं बनाई है।
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एक चेअर सेट वो भी टूटा
रोडवेज बस स्टैंड पर यात्रियों के बैठने के लिए टिकट घर के सामने मात्र तीन कुर्सियों का सैट लगा है। अभी टिकट घर चालू नहीं हुआ है, लेकिन इस सैट से एक कुर्सी गायब हो चुकी है।

अभी तक नहीं लगे एटीएम
बस स्टैंड परिसर में दो बैंक एटीएम के लिए कक्ष तो बनाए, लेकिन एटीएम नहीं लगे। जरूरत पर यात्रियों को शहर के दूसरे एटीएम से पैसा निकाले जाना पड़ता है।
बस स्टैंड निर्माण में काफी खामियां रह गई हैं। इसकी जानकारी निगम को दी जा चुकी है। बिना हैंडओवर के ही इसका उपयोग किया जा रहा है।
राम खिलाड़ी, डिपो प्रभारी

बस स्टैंड पर यात्रियों को बसों की जानकारी देने की कोई व्यवस्था नहीं है, जिससे उन्हें परेशानी उठानी पड़ती है।
-अरुण कुमार यात्री।
रेफ्रिजरेटर खराब होने से ठंडा पेयजल मुहैया नहीं हो रहा है। मजबूरन बाजार से बोतल खरीदकर गला तर करना पड़ता है।
-रामानंद वार्ष्णेय, यात्री।

बस स्टैंड पर यात्रियों के बैठने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। इससे यात्रियों को खुले में खड़े होकर बसों का इंतजार करना पड़ता है।
-साहब सिंह, यात्री।
बस स्टैंड पर रात के समय अंधेरा हो जाता है, लाइट की व्यवस्थ नहीं है। रात में बसों के इंतजार के वक्त यात्रि खुद को असुरक्षित महसूस करते हैं।
-इकरार, यात्री।
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