फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सरकार की इधर हों नजरें इनायत तो बने बात

विज्ञापन
विज्ञापन
मैनपुरी। मुख्यमंत्री के दौरे से जिले की जनता को व्यवस्थाओं में सुधार और बदलाव की उम्मीद है। यहां शिक्षा, स्वास्थ्य, ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार और बदलाव की जरूरत है। लोगों का मानना है अगर मुख्यमंत्री योगी की नजर घूमे तो निश्चित तौर पर जिले की सूरत बदल सकती है।
विज्ञापन

जिले के लिए 133 डाक्टरों के पद सृजित हैं। केवल 49 डाक्टरों की ही तैनाती है। अधिकतर पीएचसी और सीएससी पर उपचार का अभाव है। 100 शैया अस्पताल में 18 डाक्टरों के पद सृजित हैं जबकि केवल तीन की तैनाती है। ओपीडी के नाम पर केवल खानापूरी की जा रही है। 15 कर्मचारियों के सृजित पदों के सापेक्ष आज तक किसी की तैनाती नहीं हुई है। अस्पताल में पिछले चार महीने से दवाओं की किल्लत है। पहले दान की दवाओं से काम चला, अब महिला अस्पताल की दवाओं से काम चलाया जा रहा है। देहात क्षेत्र में तैनात डाक्टर तैनाती वाले अस्पताल में नहीं जाते हैं।

जिले में हर साल सैकड़ों लोग कैंसर की बीमारी से मौत के मुंह में चले जाते हैं। लोगों को इलाज के लिए मुंबई, ग्वालियर, दिल्ली तक जाना पड़ता है। सपा शासन में वर्ष 2010 में पांच करोड़ की लागत से कैंसर यूनिट बनवाई गई। करोड़ों लागत की मशीनें भी लगाई गईं, लेकिन आज तक कैंसर यूनिट चालू ही नहीं हो सकी। अगर कैंसर यूनिट चालू हो जाए तो लोगों को कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी के प्रकोप से बचाया जा सकता है। जिले के लोगों को मुख्यमंत्री से कैंसर यूनिट चालू कराने की उम्मीद एक बार फिर जगी है।
विज्ञापन


बच्चों का भविष्य बेहतर और स्वर्णिम बनाने के लिए जिले में 1653 सरकारी प्राइमरी स्कूल हैं। 533 जूनियर हाईस्कूल हैं। सरकारी स्कूलों की दशा और दिशा सुधारने के लिए जिले में 2157 शिक्षा मित्रों की तैनाती है। जबकि 5944 शिक्षकों की तैनाती है। देहात की हालत यह है अधिकांश स्कूल एकल ही संचालित हैं। शहर के समीपवर्ती स्कूलों में मानक से अधिक शिक्षक तैनात हैं। जिले के वरिष्ठ अधिकारी निरीक्षणों के दौरान इस पर आपत्ति भी जता चुके हैं। देहात के कई स्कूलों में तैनात शिक्षक तो पढ़ाने तक के लिए ही नहीं जाते हैं।

शहर की ट्रैफिक व्यवस्था बड़ी समस्या है। आए दिन शहर में जाम लगता है। इसके साथ ही शहर की सड़कों पर डग्गामार और ओवरलोड वाहन दौड़ते हैं। वहीं व्यवस्था को दुरुस्त करने की वजाय उप संभागीय परिवहन विभाग के अधिकारी केवल लकीर पीट रहे हैं। वाहनों का चालान और सीज करना समस्या का समाधान नहीं है। प्रशासनिक अधिकारी अभियान चलाकर खानापूरी कर लेते हैं। टेंपो, ई रिक्शा, प्राइवेट बसों को खड़ा कराने के लिए कोई स्थान तय नहीं है। अपनी मर्जी से चालक वाहन खड़े करते हैं। शहर के लिए ट्रैफिक के एक्शन प्लान की जरूरत है। शहर को जाम से निजात दिलाने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों को तो आगे आना ही होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें