फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बीमा फसल का डाटा गायब होने से अन्नदाता में आक्रोश

विज्ञापन
खेतों में कटी पड़ी फसल - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विज्ञापन
एटा। किसानों की फसल बीमा का डाटा गायब होने की जानकारी के बाद अन्नदाताओं में आक्रोश है। मामले में कृषि विभाग हाथ खड़े कर रहा है और बीमा में किए गए खेल का ठीकरा लीड बैंक के सिर फोड़ रहा है। वहीं आक्रोशित किसानों ने आंदोलन की रणनीति बना ली है।

अमर उजाला के ‘फसल बीमा कराने वाले 5363 किसानों का डाटा गायब’ शीर्षक से छपी खबर को पढ़ने के बाद सोमवार को किसानों के होश उड़ गए। भारतीय कियान यूनियन (अराजनैतिक) संगठन के जिलाध्यक्ष रमेश चंद्र यादव ने कहा कि फसल बीमा योजना में की गई धांधली से किसान बेहद आहत है। किसान सीमित आय होने के बाद भी फसल बीमा का प्रीमियम जमा करता है।
विज्ञापन


प्रीमियम जमा होने के बाद भी किसान का बीमा नहीं किया गया। किसान के साथ अन्याय के खिलाफ किसान यूनियन पूरी तरह से साथ खड़ी है। न्याय नहीं मिलने तक संगठन पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने कहा मामले को केंद्र और राज्य सरकार के संज्ञान में लाया जाएगा। इसके लिए किसान यूनियन जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपेगी।

भारतीय किसान यूनियन प्रमुख महासचिव कृष्णपाल सिंह ने किसानों के हितों को प्रमुखता से उठाने पर ‘अमर उजाला’ को बधाई दी। कहा कि हमारे देश के किसान की विडंबना है कि उसके साथ सरकार के नुमाइंदे कभी न्याय नहीं करते हैं। किसान वर्तमान में खून के आंसू रो रहा है। किसान का दर्द एसी दफ्तरों में बैठने वाले क्या जानें?

उनका कहना है कि मेरे साथ भी 2014 में ऐसा ही हुआ था 13 एकड़ धान की फसल का बीमा कराने के लिए 3687 रुपये प्रीमियम जमा करा था और भारी सूखा पड़ने के कारण फसल नहीं हाथ में आ सकी। इसके बाद उसने बीमा कंपनी पर क्लेम किया तो पता चला कि बीमा किया नहीं किया गया। इसके बाद डीएम से गुहार लगाने पर महज प्रीमियम लौटाया गया। समग्र विकास परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिल संघर्षी ने कहा कि किसानों को हक दिलाकर रहेंगे।
विज्ञापन



किसान प्रीमियम की रकम बैंक स्तर से लीड बैंक को दी जाती है। इसके बाद बीमा कंपनी को ड्राफ्ट के माध्यम से भुगतान किया जाता है। फसल बीमा में कृषि विभाग द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जाती। बीमा कंपनी कृषि विभाग को सिर्फ आंकड़े उपलब्ध कराते हैं।
रामऔतार वर्मा, एसएमएस, कृषि विभाग
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें