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स्वकेंद्र नहीं मला तो छोड़ दी परीक्षा

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अव्यवस्थाओं के बीच शुरू हुई बोर्ड परीक्षा - फोटो : अमर उजाला
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एटा। 26 प्रतिशत से अधिक हाईस्कूल परीक्षार्थियों ने परीक्षा छोड़कर एक दशक की अनुपस्थिति का रिकार्ड तोड़ दिया। इतना ही नहीं स्वकेंद्र परीक्षा की सुविधा न मिलने पर 18 प्रतिशत रेगुलर छात्राओं ने भी परीक्षा केंद्र नहीं देखे।
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नकल विहीन बोर्ड परीक्षाओं के एलान से नकल माफिया निष्क्रिय हो गए। वहीं नकल के दम पर हाईस्कूल का मंसूबा पाले जिले के हजारों छात्र-छात्राएं परीक्षा के पहले दिन ही मैदान छोड़ गए। विभागीय आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष रिकार्ड 26.35 प्रतिशत हाईस्कूल परीक्षार्थियों ने पहले दिन ही परीक्षा छोड़ दी है। इतना ही नहीं परीक्षा छोड़ने वाली छात्राओं का भी आंकड़ा दशक का सर्वाधिक है।

बताते चलें कि इस वर्ष हाईस्कूल बोर्ड परीक्षा के लिए 47543 आवेदन हुए थे। इनमें 30947 छात्र आवेदक थे जिनमें से पहले ही दिन 9590 छात्र परीक्षा छोड़ गए। वहीं 16596 रेगुलर छात्राओं में से 2936 छात्राओं ने भी परीक्षा केंद्रों का मुंह नहीं देखा। अधिकांश लोग इसे स्वकेंद्र परीक्षा की सुविधा न मिलने को कारण मानते हैं। बताते चलें कि वर्ष 2017 में 18 प्रतिशत, 2016 19.3 प्रतिशत एवं 2015 में 18.5 प्रतिशत परीक्षार्थियों ने परीक्षा छोड़ी थी।
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कैसे लगी नकल पर लगाम ?
शत प्रतिशत केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरों के अलावा पहली बार परीक्षा केंद्रों का ऑन लाइन निर्धारण माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा किया गया। इतना ही नहीं इस बार एक दशक में सबसे कम 126 परीक्षा केंद्र ही बनाए गए। जबकि गत वर्ष इससे कम परीक्षार्थियों के लिए 202 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। संवेदनशील एवं अतिसंवेदशील केंद्रों पर जहां स्टेटिक मजिस्ट्रेट तैनात किए गए वहंी शेष केंद्रों पर वाहय केंद्र व्यवस्थापक लगे थे। चार जोनल एवं 26 सेक्टर मजिस्ट्रेट भी सक्रिय रहे।


जिले में इस बार 26.35 प्रतिशत से अधिक रिकार्ड परीक्षार्थियों ने परीक्षा छोड़ी है। जो दशक का सर्वाधिक प्रतिशत है। स्वकेंद्र परीक्षा नीति में बदलाव के चलते छात्राओं की भी अनुपस्थिति बढ़ी है।
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एसपी यादव, जिला विद्यालय निरीक्षक
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