मथुरा। अब बिजली विभाग अफसरों की कोठियों पर प्रीपेड मीटर लगाने की तैयारी कर रहा है। जो योजना है उसके मुताबिक सितंबर में मीटर लगा दिए जाएंगे। विभाग ने यह फैसला बिजली के बढ़ते दुरुपयोग और बकाये को देखकर लिया है। दरअसल अधिकारी ट्रांसफर होने के बाद बगैर बिल जमा किए ही चले जाते हैं। मथुरा में ही सरकारी विभागों पर 6 करोड़ का बकाया है।
किसी विभाग पर तीन लाख का बकाया है तो किसी पर 5 लाख का। बिजली विभाग नोटिस पर नोटिस दे रहा है लेकिन बिल जमा नहीं किया जा रहा। यह स्थिति मथुरा की ही नहीं बल्कि प्रदेश भर की है। बिजली का सबसे ज्यादा दुरुपयोग भी सरकारी विभागों में ही हो रहा है। रात को भी पंखे चले छोड़ जाते हैं कर्मचारी। एसी लगातार चलते रहते हैं। दिन में भी सड़कों पर बल्ब जलते दिख जाएंगे। इन्हीं सब हालातों को देखकर प्रीपेड मीटर लगाने की फैसला किया गया है।
नोएडा और गाजियाबाद में इसका प्रयोग किया जा चुका है जो पूरी तरह से सफल माना जा रहा है। अब ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा के शहर में रहने वाले अफसरों के घर और आफिस पर प्रयोग किया जा रहा है। एक्सईएन प्रथम अरविंद कुमार ने बताया कि प्रीपेड मीटर लगाने की प्रक्रिया सितंबर में शुरू की जाएगी। गत दिनों इसके आदेश आ गए हैं। पहले चरण में मथुरा को एक हजार प्रीपेड मीटर दिए जाएंगे। मीटर मिलने पर पहले बड़े बकाएदार अफसरों के यहां लगाया जाएगा। बकाया वसूलने की प्रक्रिया तेज की जा रही है।
पुलिस से कौन वसूलेगा साढ़े तीन करोड़
पुलिस पर सबसे ज्यादा बकाया है। साढ़े तीन करोड़ की बकायेदारी है। पुलिस वालों से बिल की वसूली करने में बिजली विभाग वाले घबराते भी हैं। क्योंकि कई अभियान चलाने में पुलिस की जरूरत भी पड़ती है।
रिचार्ज कूपन की तरह मिलेगी बिजली
प्रीपेड मीटर रिचार्ज कूपन की तरह होगा। प्रीपेड मीटर में सिम की ही तरह एक चिप लगी होगी जिसका एक नंबर होगा। उस नंबर के आधार पर ही रिचार्ज किया जाएगा। जब पैसा खत्म हो रहा होगा तो मीटर अलार्म बजाकर सावधान भी करेगा। पैसा खत्म होते ही लाइट बंद हो जाएगी।