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फाइलेरिया रोग से ग्रस्त मिले 24 बच्चे, स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप

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फाइलेरिया रोग से ग्रस्त मिले 24 बच्चे, स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप - फोटो : अमर उजाला
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कासगंज।
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जिले में फाइलेरिया से ग्रस्त 24 बच्चे पाए जाने से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप है। स्वास्थ्य विभाग ने इसकी रिपोर्ट शासन को भेजी है। अभी और चिह्नित बच्चों का परीक्षण कराया जा रहा है। कुछ और बच्चों के परीक्षण की रिपोर्ट आना अभी शेष है। इससे पूर्व जिले में फाइलेरिया जैसी बीमारी को लेकर कोई जांच पड़ताल नहीं की गई थी। पहली बार हुई जांच पड़ताल के बाद यह खतरनाक परिणाम सामने आए हैं।
जिले में गुरुवार तक 30 स्कूलों में जांच हुई थी। स्वास्थ्य कर्मियों की टीम ने चिह्नित छात्र-छात्राओं के रक्त के नमूने लिए। जिनकी जांच प्रयोगशाला में कराई गई। इन बच्चों के रक्त की जांच रिपोर्ट सामने आई तो 24 बच्चों में फाइलेरिया बीमारी की पुष्टि हुई है। सर्वाधिक फाइलेरिया ग्रसित 14 बच्चे विकासखंड गंजडुंडवारा में पाए गए हैं। पटियाली ब्लॉक में 5 बच्चे, सोरों ब्लॉक में 3, कासगंज शहर में एक, कासगंज ब्लॉक में एक बच्चे फाइलेरिया ग्रसित पाए गए हैं। इन बच्चों की रिपोर्ट को स्वास्थ्य विभाग ने शासन को जानकारी प्रेषित की है। फाइलेरिया बीमारी के बारे में जिले में कम ही लोग जानते हैं, लेकिन पहली बार इतनी बड़ी संख्या में बच्चों के फाइलेरिया ग्रस्त पाए जाने से क्षेत्र के लोगों की चिंताएं बढ़ी हैं।
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कैसे फैलता है ये रोग
मच्छरों से यह रोग फैलता है। जो काफी खतरनाक है। इसका संक्रमण होने पर पैर काफी सूज जाता है और पैर की स्थिति हाथी के पांव जैसी बन जाती है। खून में संक्रमण फैलने के बाद यह बीमारी शरीर के किसी भी अंग को निष्क्रिय कर सकती है। जिसका इलाज संभव नहीं हो पाता। समय रहते बीमारी की जानकारी होने पर इसके बढ़ते प्रभाव को रोका जा सकता है। पूर्वांचल के काफी विद्यालयों में छात्र छात्राओं में फाइलेरिया बीमारी की पुष्टि होने के बाद शासन स्तर से पूरे प्रदेश के स्कूलों में इसकी जंाच कराई गई।
24 छात्र छात्राओं में फाइलेरिया सकारात्मक होने की पुष्टि हुई है। सर्वाधिक बच्चे गंजडुंडवारा ब्लॉक में मिले हैं। अभी कुछ रिपोर्ट आना बाकी हैं। अभी और बच्चों के रक्त के नमूने संग्रहीत किए जा रहे हैं। फाइलेरिया एक खतरनाक बीमारी है। इन सभी पीड़ित बच्चों का इलाज किया जाएगा। राजकुमार सारस्वत, मलेरिया अधिकारी।
नदरई में हुई फाइलेरिया की जांच
कासगंज। नदरई के पूर्व माध्यमिक विद्यालय में स्वास्थ्य विभाग की टीम फाइलेरिया की जांच करने पहुंची। यहां 16 विद्यार्थियों के रक्त से नमूने लिए गए। इस मौके पर प्रधानाध्यापक ऊषा कुमारी, अंशु निगम सहित आदि मौजूद रहे।


माइक्रो फाइलेरिया के विषाणुओं को तलाशने में जुटा स्वास्थ्य विभाग
एटा। मच्छर काटने से पैदा होने वाले माइक्रो फाइलेरिया के विषाणुओं को ढूंढने के लिए स्वास्थ्य विभाग जुट गया है। जांच के लिए छह-छह सदस्यों की टीम बनाई गई है।
माइक्रो फाइलेरिया (मिनी टास) एक ऐसा विषाणु हैं, जिसके शरीर में पनपने से व्यक्ति अपंगता का शिकार हो जाता है और हाथ पैर सूज कर मोटे-मोटे हो जाते हैं। यह विषाणु मच्छर के काटने से पैदा होता है। इसका सर्वे पहली बार जिले में किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने जिले भर से 30 विद्यालयों का चयन किया है। इसमें 480 बच्चों की जांच के बाद सर्वे की रिपोर्ट शासन को भेजी जानी है। प्रत्येक विद्यालय से 16 संभावित बच्चों की फाइलेरिया जांच किट से परीक्षण किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदारों का कहना है कि 19 नवंबर तक चलने वाले सर्वे के दौरान यदि किसी व्यक्ति को फाइलेरिया होने की आशंका है अथवा चिकित्सक घोषित करते हैं तो ऐसा मरीज मलेरिया नियंत्रण कार्यक्रम दफ्तर में पहुंचकर जांच करा सकता है। इसके लिए सरकार की ओर से दवाएं निशुल्क मुहैया कराई जा रही हैं।
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माइक्रो फाइलेरिया (मिनी टास) का पहली बार जिले में सर्वे कराया जा रहा है। माइक्रो फाइलेरिया नाम का विषाणु मच्छरों के काटने से फैलता है। जांच रिपोर्ट शासन द्वारा मांगी गई है।
डा. सतीश नागर, नोडल अधिकारी - माइक्रो फाइलेरिया
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