एटा। प्रशासन जिले को खुले में शौच मुक्त घोषित कर चुका है, लेकिन असलियत ऐसी है कि शर्म आती है। जिले को ओडीएफ करने की घोषणा के बाद प्रशासन भले ही अपनी पीठ थपथपा रहा है, लेकिन जिले के लोग आज भी खुले में ही शौच जा रहे हैं। गड्ढे खोदकर शुरू होने वाला शौचालय निर्माण अभियान खुद गड्ढे में चला गया है। ऐसा लगता है शौचालय निर्माण के लिए खोद गए गड्ढों ही आधार मानकर प्रशासन ने जिला ओडीएफ घोषित कर दिया है।
30 अक्तूबर को आनन फानन प्रशासन ने जिले को खुले में शौच मुक्त तो घोषित कर दिया। फर्जी आंकड़ेबाजी और तेजी से की गई फर्जी फीडिंग के जरिए कंप्यूटर और कागजों पर जिला ओडीएफ हो गया। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। शौचालय निर्माण को लेकर प्रतिदिन आ रहे नए मामलों में एक और किस्सा जुड़ गया है।
यह किस्सा है जिले के सकीट ब्लॉक की ग्राम पंचायत चिलासनी के छोटे से गांव हीरापुर का। यहां जिम्मेदारों ने शौचालय निर्माण के नाम पर जमकर खेल किया। कागजों पर गांव के 162 परिवारों के शौचालय बनवाकर गांव को 30 सितंबर को ओडीएफ कर दिया गया है, लेकिन गांव में अब तक तमाम परिवारों को शौचालय निर्माण का अनुदान ही मयस्सर नहीं हुआ है।
इसके चलते यहां शौचालय निर्माण पूरा नहीं हुआ। इस कारण यहां के परिवार खुले में शौच जाने को मजबूर हैं। यहां स्वच्छ भारत अभियान पूरी तरह से फेल नजर आ रहा है। लोगों का कहना है कि प्रधान और सचिव की मिलीभगत से यहां बस गड्ढे खुद कर ही रह गए हैं, लेकिन अनुदान नहीं मिलने से काम अटका है।
----------
बूढ़े कदम दे रहे जबाव
गांव के वृद्ध लोग बताते हैं कि वृद्धावस्था के चलते अब पैरों से चला नहीं जाता। सोचा था कि शौचालय बन जाएगा, तो राहत मिलेगी। मगर ग्राम प्रधान, सचिव और जिम्मेदारों ने कोई अनुदान नहीं दिया। मजबूरी में सुबह-सुबह खेत जाना पड़ता है। गांव की बहू बेटियां भी खेतों में शौच जाती हैं।
कहते हैं लोग
हमारे यहां गड्ढा खुद गया था, लेकिन अब तक कोई अनुदान नहीं मिला है। पता लगा है कि पैसा आया था, लेकिन जिम्मेदार डकार गए।
रामबेटी कुशवाह
खेतों में शौच जाने के लिए मजबूर हैं। बहुत शर्म का सामना करना पड़ता है। आए दिन टीवी पर देखते हैं कि स्वच्छता अभियान चल रहा है, लेकिन गांव में कुछ भी नहीं है।
किरन देवी
गांव में शौचालयों का निर्माण हुआ ही नहीं है। गड्ढे खुद गए हैं, लेकिन कोई अनुदान नहीं मिल सका है। इसके चलते निर्माण हुआ ही नहीं है।
शकुंतला
गांव में शौचालयों का निर्माण पूरा हुआ ही नहीं है। रोज खुले में शौच जाते हैं। वृद्धावस्था होने के चलते खेत में शौच जाने में दिक्कत होती है। गड्ढे खुद गए हैं, अनुदान मिले तो निर्माण पूरा हो।
मलिखान सिंह
कहते हैं आंकड़े
570 शौचालय कागज पर बने चिलासनी में
162 शौचालय बनवाने का दावा हीरापुर में
30 सितंबर को ओडीएफ किया गया है गांव
164 गांव हैं सकीट ब्लॉक में