फिरोजाबाद। टमाटर सॉस के नाम पर बेची जा रही नकली सॉस के कारोबार का फिर भंडाफोड़ हुआ है। रसायनिक रंगों व अरारोट को मिलाकर इसे बनाया जा रहा था। खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने नकली सॉस का नमूना लेकर जांच को भेजा है। सॉस के 120 पैकेट सीज किए हैं। जहां ये कारोबार किया जा रहा था, वहां चौथी बार छापेमारी हुई है।
खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने झील की पुलिया न्यू रामगढ़ क्षेत्र में चल रही सॉस व चाऊमीन बनाने की इकाई पर बुधवार को छापा मारा। यह इकाई मनोज राठौर की है। टीम ने चाऊमीन की फैक्ट्री देखी, जहां साफ-सफाई नहीं थी। टीम ने मैदा और चाऊमीन का नमूना लिया। इधर, सॉस की फैक्ट्री देखकर अधिकारी भी चौक गए। सॉस बनाने में साइट्रिक एसिड़, अरारोट, रसायन रंग और मसालों का इस्तेामल किया जा रहा था।
इन्हें मिलाकर कई दिन तक रखा जाता था और इस सामग्री को मशीन में मिक्स कर पैकिंग की जाती थी। टीम ने संदेह के आधार पर नमूना जांच के लिए भेज दिया है। 500 ग्राम के 120 पैकेट नष्ट कराए हैं। कार्रवाई एफएसडीए के जिला अभिहित अधिकारी सैय्यद शाहनवाज हैदर आबिदी के निर्देशन पर मुख्य खाद्य सुरक्षाधिकारी बीएस कुशवाह व खाद्य सुरक्षा अधिकारी गजराज सिंह द्वारा की गई। आरोपी का लाइसेंस निरस्त कर दिया है।
एक ही व्यक्ति के यहां बार-बार नकली सॉस पकड़ा जाना इस ओर इशारा कर रहा है कि विभाग में किसी व्यक्ति का उसे संरक्षण मिला है। इससे पहले भी फर्म संचालक मनोज राठौर के नकली सॉस का कारोबार का तीन बार भंडाफोड़ हो चुका है। दो बार न्यू रामगढ़ क्षेत्र में नकली सॉस पकड़ा चुका चुका है। एक बार महादेव नगर में यह इकाई चलती मिली थी।
मगर आरोपी पर सख्त कार्रवाई न होने से यह कारोबार लगातार फलता-फूलता गया। पिछली बार टीम ने सॉस नष्ट की कार्रवाई महज कागजों में ही दिखा दी। हकीकत में सॉस नष्ट नहीं की। इसके बाद फिर से यह कारोबार चलता रहा। सीएफएसओ बीएस कुशवाह ने बताया कि पूर्व में भी आरोपी के यहां छापेमारी हुई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद मुकदमा दर्ज कराया जाएगा।
दुकानों पर होता है सप्लाई
फिरोजाबाद। निर्माण इकाई से नकली सॉस का आठ सौ ग्राम का पैकेट 10 रुपये में बेचा जाता है। इसे पेटीज, अंडा बिक्रेता के यहां बेचा जाता है। करीब छह ड्रमों में अधूरा पका हुआ नकली सॉस रखा था। जबकि पांच सौ से अधिक पके सॉस रखे हुए थे।
लाइसेंस जारी कैसे हुआ
फिरोजाबाद। आरोपी के पास खाद्य सुरक्षा विभाग का लाइसेंस है। आखिरकार लाइसेंस कैसे जारी हुआ, इस पर सवाल उठने लगे हैं। जबकि चार बार पहले भी मामला पकड़ा जा चुका है, तो लाइसेंस निरस्त क्यों नहीं किया गया। आरोपी के पूर्व में भेजे गए नमूनों की रिपोर्ट भी विभाग दबा गया।