एटा। जिले में झोलाछापों की मनमानी स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाइयों के बाद भी कम नहीं है। बिना पंजीकरण क्लीनिक और नर्सिंग होम चलाने वाले झोलाछाप गलत इलाज से रोज एक मौत के जिम्मेदार बन रहे हैं। जिले में झोलाछापों की बाढ़ जिंदगी छीन रही है। स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई के बाद भी झोलाछापों के हौंसले बुलंद हैं। आइए आपको दिखाते हैं जिले के कुछ अवैध क्लीनिक और नर्सिंग होम का हाल। पढ़िए रिपोर्ट....
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केस-एक
शहर के आशीष पैलेस में संचालित हो रहे अवैध क्लीनिक पर बोर्ड बेशक मेडिकल स्टोर का लगा हो, लेकिन यहां गर्भपात, डिलीवरी जैसे काम होते हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों एक बार छापा मारा भी, लेकिन दान दक्षिणा के बाद इधर आने की किसी की हिम्मत नहीं हुई।
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केस-दो
शांति नगर में केशव सरस्वती शिशु मंदिर के पीछे संचालित हो रहे अवैध नर्सिंग होम का पूरे जिले में खासा नाम है। एक झोलाछाप महिला यहां सारे काम करती हैं। प्रसव से लेकर महिलाओं को दवा देने का काम भी यहां चलता है। चिकित्सक पर न तो कोई डिग्री है और न ही कोई पंजीकरण है। इनके यहां मरीजों की भीड़ जमा होती है।
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केस तीन
शहर के रेवाड़ी मोहल्ला में एक चिकित्सक काफी प्रसिद्ध हैं। यह बीएएमएस का डिप्लोमा किए हैं, लेकिन गर्भपात और प्रसव जैसे काम बखूबी कर लेती हैं। यहां मरीजों का हर समय जमावड़ा लगा रहता है। प्रसूता की हालत बिगड़ने पर उसे रेफर कर दिया जाता और खुद फरार हो जाती हैं।
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ग्रामीण क्षेत्रों में भी धंधा
जिले में झोलाछापों की कमी नहीं है। शहर से सटे गांव मरथरा और जिसरमी में झोलाछापों का खासा नेटवर्क है। नहर के किनारे दुकानों में बने क्लीनिक और अस्पतालों में मरीजों का खुलेआम इलाज होता है लेकिन किसी को इधर ध्यान देने की फुरसत नहीं है।
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इनका कहना है
झोलाछापों के खिलाफ लगातार अभियान चल रहा है। जल्द ही सभी जगह छापेमारी कर अवैध क्लीनिक और गर्भपात केंद्र बंद होंगे।
डा. चंद्रशेखर शर्मा, एसीएमओ